पिछले एक माह से समाजवादी पार्टी में चल रही पारिवारिक कलह दिनभर चर्चा का विषय बनी रही। सियासी दिग्गजों ने इसे सरकार की विफलता से ध्यान हटाने के लिए सोची समझी नौटंकी करार दिया। जबकि कई ने बेदाग छवि वाले मुख्यमंत्री अखिलेश के सरकार में लूट की दौलत की बंदरबांट का झगड़ा करार दिया है। सोमवार को भी जिले भर में चौक चौराहों और गांव की चाय पान की दुकानों में यही चर्चा होती रही। कई लोगों ने तो कहा कि राजनीति के माहिर खिलाड़ी अपने बेटे के राह की कांटा साफ कर रहे हैं। क्योंकि सीएम के पिता हैं।
जिला अस्पताल के पास चाय और मेडिकल की दुकान पर कुछ प्रबुद्ध दिखने वालों के बीच नेता की छवि पर बहस छिड़ी थी। धीरे धीरे संख्या करीब पांच की पहुंच गई। लोगों का कहना था कि अखिलेश वास्तव में अच्छा नेता हैं लेकिन मंत्रिमंडल में पुराने लोगों की भरमार से कुछ कर नहीं पाए। अब तो बहुत देर हो चुकी है क्योंकि प्रदेश में कानून का राज नहीं कर पाए। कलेक्ट्रेट के पास वकीलों के साथ मुवक्किल भी सपा परिवार के झगड़े पर सीधी टिप्पणी कर रहे थे कि मुलायम सिंह अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य को सुरिक्षत कर रहे हैं। कुछ ऐसी ही बातें विकासभवन स्थित चाय की दुकान पर लोगों में थी। सब की सहानुभूति मुख्यमंत्री अखिलेश के प्रति थी लेकिन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के रुख का अलग अलग आंकलन किया जा रहा था।