घट रहा है मिट्टी में जीवांश कार्बन, ऊसर हो जाएंगे खेत
- अंधाधुंध रासायनिक उर्वरक व कीटनाशकों के प्रयोग का दुष्परिणाम
विकास पाठक
बस्ती। अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रयोग से मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा करीब 0.5 फीसदी कम हो गई है। जबकि स्वस्थ मिट्टी में 0.8 प्रतिशत जीवांश कार्बन होना चाहिए। मिट्टी में इसकी कमी को कृषि विशेषज्ञ फसलों के उत्पादन के लिहाज से अच्छा नहीं मानते।
बताया जाता है कि जीवांश कार्बन घटने का सबसे बड़ा कारण खेत में फसल अवशेष जलाना है। हालांकि इसके लिए किसानों को अनवरत जागरूक किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरबी सिंह बताते हैं कि जीवांश कार्बन की कमी से मृदा धीरे-धीरे ऊसर हो सकती है। साथ ही यह मिट्टी को अम्लीय व क्षारीय होने से भी बचाता है। इसकी कमी के चलते मिट्टी रासायनिक उर्वरकों को अवशोषित नहीं करती जिससे फसल के पौधे विकसित नहीं होते। जो उपज को प्रभावित करते हैं। मिट्टी में वायु संचार और जल संचयन भी प्रभावित होता है। इस स्थिति से निपटने के लिए गोबर, वर्मी कंपोस्ट व हरी खाद का प्रयोग किया जाना बेहतर माना गया है। जमीन में इसकी मात्रा अधिक होने से मिट्टी की भौतिक एवं रासायनिक ताकत बढ़ जाती है। संवाद
सनई, ढैंचा, उड़द, मूंग, गोबर बढ़ाएंगे कार्बन की मात्रा
कृषि विभाग के मृदा परीक्षण प्रकोष्ठ के मंडल प्रयोगशाला प्रभारी अरविंद सिंह बताते हैं कि 2016 में जीवांश कार्बन की मात्रा 0.6 प्रतिशत थी। इससे पहले 0.8 प्रतिशत से अधिक थी। लेकिन अब यह 0.2 से 0.5 प्रतिशत के बीच रह गई है। किसानों को जायद सीजन में हरी खाद, सनई व ढैंचा की बुआई करने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा उड़द, मूंग व अन्य दलहन-तिलहन फसलों का रकबा भी बढ़ाना होगा। कहा कि उपज मिलने के बाद फसल अवशेष पर वेस्ट डीकंपोजर छिड़ककर खेत में जुताई कर दें। यह अवशेष सड़कर कार्बन की मात्रा बढ़ाते हैं। इसे लेकर वित्तीय वर्ष 2020-21 में 110 जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया था। उप कृषि निदेशक डॉ. एसके त्रिपाठी ने बताया कि हरी खाद के लिए ढैंचा बीज पर 50 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा फसल अवशेष को खाद में बदलने के लिए इस बार इन-सीटू योजना के तहत किसानों को वेस्ट डीकंपोजर का कल्चर निशुल्क वितरित किया गया है।
29 रुपये में जान सकते हैं मिट्टी की सेहत
मृदा प्रयोगशाला मंडल प्रभारी अरविंद सिंह बताते हैं कि किसान एक एकड़ खेत में छह
सेंटीमीटर गहरे ‘वी’ आकार के आठ गड्ढे से करीब 500 ग्राम मिट्टी निकालें। इससे कंकड़ व घास निकालकर बीन कर साफ कर लें। सूखे नमूने को प्रयोगशाला लाएं। यहां 29 रुपये में तीन तत्व (एनपीके) व 102 रुपये में 12 तत्वों की जांच करा सकते हैं।
क्या है जीवांश कार्बन
पर्यावरण में मुक्त कार्बन डाई-ऑक्साइड को पौधे कार्बन के जैविक रूप जैसे शर्करा, स्टार्च, सेल्यूलोज आदि को कार्बोहाइड्रेट में परिवर्तित करते हैं। इस प्रकार पौधों की जड़ों एवं अन्य पौधों के अवशेषों से कार्बन अलग होकर मिट्टी में मिल जाता है। इसे ही जीवांश कार्बन कहते हैं।