ढाबे पर सांप निकालते समय डस लेने पर फैल गया था जहर
संवाद न्यूज एजेंसी
कप्तानगंज (बस्ती)। जहरीले सांपों से दूसरों की जिंदगी बचाता आ रहा संपेरा खुद जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था। उसे निकालते समय सांप डस लिया था। जिला अस्पताल से उसे एक बार रेफर कर दिया गया था। मगर उसके साथ किसी तीमारदार के न होने की वजह से फिजीशियन डा. रामजी सोनी ने खुद उसकी जिंदगी बचाने का बीड़ा उठाया। तीन घंटे की कोशिश के बाद जहर का असर कम हुआ और उसे नई जिंदगी मिली।
कप्तानगंज थाना क्षेत्र के धर्मसिंहपुर के रहने वाले वासुदेव उर्फ छटंकी बाबा सांप पकड़ने का काम करते हैं। उनके परिवार में कोई नही हैं। शुक्रवार को दोपहर में हरैया थाना क्षेत्र के बिजरा फोरलेन पर स्थित एक ढाबे पर सांप पकड़ने गये थे। उसी दौरान जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया उसके बाद गम्भीर हालत में सपेरे को आसपास के लोगों ने एक टेम्पो से इलाज के लिये भेज दिया। वह कप्तानगंज सीएचसी पर आया पर बिना देरी किए ही वह जिला अस्पताल के लिए निकल गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। उसके बाद सपेरे की हालत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कालेज गोरखपुर के लिये रेफर कर दिया। गांव के शम्भू और एक अन्य युवक जिला अस्पताल पहुंच गये लेकिन सपेरे की मजबूरी बताकर डाक्टर से जिला अस्पताल में ही इलाज करने का आग्रह किया। शाम को उसकी हालत बिगड़ने लगी। सूचना पर शहर कोतवाल विजय कुमार दुबे ने सपेरे के सहयोग में जिला अस्पताल चौकी प्रभारी विश्वमोहन राय को भेजा। बिहरा के प्रधानाचार्य सतीश रंजन सिंह,विनोद कसौधन प्रधान, मनीष सिंह सहित कई लोग पहुंचे और बेहतर ढंग से संपेरे का इलाज शुरू कराया। देर रात उसकी हालत पूरी तरह से ठीक हो गई। संपेरे ने बताया कि डॉक्टर पुलिस और जनसहयोग से मेरी जान बच गई। डॉ रामजी सोनी ने बताया कि सपेरे की हालत काफी ठीक है।