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Basti News: नाग पंचमी पर जगह-जगह पूजे गए नाग देवता

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बस्ती। सोमवार को नाग पंचमी का त्योहार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। शहर से लेकर गांवों तक लोगों ने नाग देवता की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। जगह-जगह मेले भी लगे, जहां बच्चों ने झूले और अन्य मनोरंजन का आनंद उठाया। कई गांवों में तालाब और पोखरों के किनारे भाई-बहनों ने गुड़िया पीटने की पारंपरिक रस्म निभाई।
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मान्यता है कि सावन में नाग देवता की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और दरिद्रता व कलह दूर होती है। पंडित देवर्षी मिश्र ने बताया कि नाग पंचमी के दिन स्नान के बाद घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थल पर नाग की आकृति बनाकर पूजा करने का विधान है। कई स्थानों पर गोबर से मुख्य द्वार के दोनों ओर पांच फन वाले नाग देवता की आकृति बनाई गई। श्रद्धालुओं ने ‘नागराजाय नम:’ मंत्र का जाप करते हुए नाग देवता को दूध, खीर और पुष्प अर्पित किए।
महिलाएं और युवतियां गुड़िया लेकर भाइयों के साथ तालाब और पोखरों पर पहुंचीं। गुड़िया को पानी में डालने के बाद भाइयों ने बेर की लकड़ी से उसे पीटा। इसके बाद चने और गुड़ का प्रसाद बांटा गया। कई स्थानों पर महिलाओं ने कजरी और सावन के गीत गाते हुए झूले का आनंद लिया। नगर पालिका कार्यालय के बगल में भी मेले का आयोजन किया गया।
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बभनान के बागेश्वर नाथ मंदिर पर लगा मेला
बभनान। कस्बे के बाबा बागेश्वर नाथ मंदिर परिसर में नाग पंचमी के अवसर पर मेला लगा। कस्बे के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग बच्चों के साथ मेले में पहुंचे और मनोरंजन किया। मंदिर के शिवालय में जलाभिषेक के लिए भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। गोंडा जिले के स्वामीनारायण छपिया मंदिर परिसर स्थित तालाब से जल भरकर बड़ी संख्या में कांवड़ियों ने मंदिर में जलाभिषेक किया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रबल मालानी ने बताया कि बागेश्वर नाथ मंदिर क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों में शामिल है। नाग पंचमी पर यहां सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगती है, जो शाम तक मेले में बदल जाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में साफ-सफाई और प्रकाश की व्यवस्था कराई गई।
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तालाबों पर गुड़िया पीटने की परंपरा हुई कमजोर
मुंडेरवा। नाग पंचमी पर तालाबों पर गुड़िया पीटने की परंपरा अब लगभग समाप्त होती जा रही है। गांवों में नाग पंचमी पर होने वाली कुश्ती की परंपरा भी पहले की अपेक्षा कम हो गई है। पंडित नरोत्तम मिश्रा और पंडित सच्चिदानंद त्रिपाठी ने बताया कि नाग पंचमी सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन नाग देवता की पूजा परिवार की सुरक्षा, सर्पदंश के भय से मुक्ति और सुख-शांति की कामना के लिए की जाती है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर पूजा-अर्चना करने से कुंडली के अशुभ योग और कालसर्प दोष का प्रभाव कम होता है।
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