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Basti News: सफेद वाली छोटी पर्ची यानी बाहर की दवा... गुलाबी है तो अस्पताल से लीजिए

Sat, 07 Oct 2023 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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दलालों के काकस से उबर नहीं पा रहा जिला अस्पताल, डॉक्टर लिख रहे बाहर की दवा
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वार्ड, ओपीडी, ओटी हर जगह मरीजों के आगे पीछे घूम रहे दलाल, मौका पाते ही कर रहे गुमराह
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आइए आज आपकोे जिला अस्पताल का हाल बताते हैं। शासन भले ही सरकारी अस्पतालों में सभी सुविधाएं मिलने का दावा कर रहा है, लेकिन यहां का खेल निराला है। दवाएं अब भी बाहर की लिखी जा रही हैं। शुक्रवार की सुबह एक मरीज, डॉक्टर के पास पहुंचा। उसने कहा- डॉक्टर साहब सीने में दर्द है, सांस भी फूल रहा है...। उधर से कुछ खास जवाब नहीं मिला। क्योंकि मास्क के अंदर मुंह बंद है। सिर हिलाते हुए आला मरीज की ओर बढ़ा दिया। आवाज आई लंबी सांस लो...। फिर लगा दिए बदन पर आला। कुछ देर बाद आला फिर गले में और हाथ में कलम आ गई। जल्दी-जल्दी तीन पर्चों पर दवाएं लिख दीं।
इसके तुरंत बाद मरीज का पर्चा सामने की कुर्सी पर बैठे सफेद लिबास वाले युवक ने थाम लिया। मरीज को समझाते हुए बोला कि छोटी पर्ची वाली दवा बाहर मिलेगी। गुलाबी पर्चे की दवा अंदर से ले लीजिए। इसके साथ अस्पताल की मुहर लगी छोटी पर्ची को दवा काउंटर पर जमा करने को कहा गया। यह दास्तां है जिला अस्पताल में मुंडेरवा से आई मीना देवी की। उनके बाद नंबर आया मुन्नी देवी का तो उनके साथ भी यही हुआ। अस्पताल के गुलाबी पर्चे के साथ दो छोटे पर्चे हाथ में थमाए गए। एक को अस्पताल के दवा काउंटर पर जमा करने को कहा गया और दूसरा पर्चा दिखाकर बाहर से दवा खरीदने की बात समझाई गई।
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हां, अंदर-बाहर वाले पर्चों को समझाने का काम डॉक्टर साहब स्वयं नहीं कर रहे थे, बल्कि उनके सामने की कुर्सी पर बैठे सफेद लिवास वाले दो युवक कर रहे थे। पूछने पर दोनों ने खुद को प्रशिक्षु बताया। इस बीच डॉक्टर साहब चुपचाप रहकर केवल मरीज देखते रहे। अस्पताल की ओपीडी के एक चेस्ट स्पेशलिस्ट का यह दृश्य बानगी मात्र है। यहां तो करीब सभी डॉक्टरों के कक्ष में इसी पैटर्न पर मरीज देखे जा रहे हैं। उन्हें सरकारी पर्चे के साथ बाहर की दवाओं की पर्ची थमा दी जा रही है।
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डॉक्टर साहब घर पर होंगे, वहीं दिखा लीजिए
सुबह के नौ बजे अस्पताल खुल गया था। मरीजों के पर्चा बनने लगे थे। ओपीडी में ही एक बाल रोग विशेषज्ञ का कक्ष सूना है। यहां एक बाहरी युवक मरीजों का पर्चा जमा कर रहा था। तभी तीन साल के मासूम के साथ नगर बाजार से प्रियंका पहुंची। बोलीं-डॉक्टर साहब कब आएंगे उनका बच्चा गंभीर है। वहां पर्चा जमा कर रहे युवक ने जवाब दिया कि अभी तो डॉक्टर साहब घर पर होंगे। जल्दी है तो वहीं जाकर दिखा लीजिए। परिसर में ही उनका आवास है। कहिए तो किसी से पहुंचवा दूं। महिला ने हां बोली तो तुरंत दूर खड़े दूसरे युवक को इशारे में बुलाकर मरीज के साथ जाने को कह दिया।
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ओपीडी के ठीक सामने दवा दुकानों पर बुलाए जा रहे थे मरीज
डॉक्टर कक्ष से बाहर निकलते ही वहां घूमने वाले दलाल मरीजों के आगे-पीछे चलने लग रहे थे। मदद की भूमिका में आकर बाहर से लिखी हुई दवा की पर्ची अपने हाथ में थामते हुए कहा, आइए...आइए, बाहर चलिए हम दवा दिलाते हैं। ओपीडी से बाहर आने पर ठीक सामने अस्पताल की चहारदीवारी से सटे कुछ दवा की दुकानें दिखती हैं। जिनका शटर अस्पताल की ओर है। वहां से मरीजों को बुलाकर दवा देने का खेल जारी रहा।
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ओटी में भी घूमते मिले दलाल
जिला अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में डॉक्टरों के आगे-पीछे कुछ बाहरी लोग घूमते हुए दिखाई दिए। मरीज, डॉक्टर से सलाह ले रहे थे। उन्हें बाहर से कुछ उपकरण मंगाने की राय दी जा रही थी। इसके तुरंत बाद दलाल मरीज से मुखातिब होकर उन्हें ऑपरेशन से संबंधी उपकरण आसानी से दिलाने का दावा कर रहे थे। मरीज परवीन के हाथ में फैक्चर बताया गया। बाहर से राॅड लाने की सलाह दी गई। ओटी के बाहर तुरंत दलाल मदद का दिखावा कर राॅड उपलब्ध कराने का सौंदा कर लिया।
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बाहर की दवा लिखने पर क्या बोले डॉक्टर
ओपीडी में मरीजों को बाहर की दवा लिख रहे डॉक्टर ने पहले सवाल का जवाब नहीं दिया। बाद में कहा कि सांस फूलने और ब्लडप्रेशर से संबंधित दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। मरीज को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए बाहर से दवा लिखी जा रही है। हालांकि, मरीजों को संबंधित फार्मूले की जेनरिक दवाओं को भी लेने की सलाह दी जा रही है।
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अस्पताल की जांच पर भरोसा नहीं
मरीजों को अस्पताल की जांच पर भरोसा नहीं हो पा रहा है। यहां मिले सचिन श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने भाई की जांच एक महीने पहले जिला अस्पताल के लैब में कराया था। उनका ब्लड शुगर, सीबीसी, एलएफटी, केएफटी की जांच रिपोर्ट में सब नार्मल दिखाया। मगर, उनकी स्थिति बिगड़ती गई। बाद में प्राइवेट लैब में जांच कराने पर पता चला उनका शुगर लेवल 500 के आसपास था।
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बेटे की तबीयत खराब है। एक घंटे लग गए पर्चा बनवाने में। इसके एक घंटे बाद डॉक्टर को दिखाने का नंबर आया। डॉक्टर साहब बिना कुछ बोले बेटे को देखा। कुछ दवा अंदर से दिए हैं और कुछ बाहर की। दवा लेकर जा रहे हैं। नहीं फायदा होगा तो फिर आएंगे।
सुनीता, कलवारी
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मैं गांव के एक मरीज को लेकर आया हूं। उसके पेट में दर्द है। लगभग दो घंटे बाद डॉक्टर को दिखा पाया। डॉक्टर ने मरीज को ज्यादा समय नहीं दिया। बस पेट की समस्या बताते ही दवा लिखनी शुरू कर दी।
आदित्य नाथ मिश्र, गायघाट
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कान में समस्या है। डॉक्टर साहब को दिखा लिए हैं। तीसरी बार हम आए हैं, लेकिन विशेष फायदा नहीं हुआ है। इतना पैसा है नहीं कि बाहर किसी डॉक्टर को फीस देकर दिखा सकें। यहां इलाज के नाम पर कोरम पूरा किया जाता है।
-रीता देवी, महादेवा
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रुपये के अभाव में सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आए हैं। डॉक्टर ने बाहर की दवा और कुछ जांच लिख दी है। बाहर खड़े एक व्यक्ति ने बताया कि उनकी जांच अंदर नहीं होगी बाहर के लैब से करानी होगी। खर्चा 1500 रुपये बताया है। हमारे पास उतना पैसा नहीं है।
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शिवकुमार, रसूलपुर
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कोट
अस्पताल में सभी तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। यदि कोई डॉक्टर दवा की अनुपलब्धता की बात कह रहा है तो यह झूठ है। दलालों के प्रवेश प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे लोगों की यदि मरीज शिकायत करें तो तत्काल उन्हें पुलिस से पकड़वाया जाएगा।
-डॉ. सतीश चंद्र कौशल, एसआईसी, जिला अस्पताल
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