बस्ती। जिले के एसआईआर प्रक्रिया का एक चरण पूरा होने के बाद अब हलचल और बढ़ गई है। बीएलओ से नोटिस मिलने के बाद नो-मैपिंग वाले मतदाताओं अपना कामकाज छोड़कर मतदाता बनने के लिए साक्ष्य जुटाने पड़ रहे हैं। जवाब देने के लिए सप्ताह भर का समय मिलने के कारण आपाधापी मची हुई है।
बता दें कि 21 जनवरी से ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर एईआरओ की टीम नो-मैपिंग वाले मतदाताओं की सुनवाई कर है। मगर तमाम साक्ष्य जुटाने से लेकर प्रस्तुत करने में तरह-तरह की समस्या आ रही है। नो-मैपिंग वाले मतदाताओं का कहना है कि द्वितीय चरण की प्रक्रिया काफी जटिल हो गई है। पहले माता-पिता, दादा-दादी का वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम होने का विवरण ईपिक नंबर सहित देना था। अब जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर का नकल, बैंक पासबुक, आधार आदि दस्तावेज की मांग की जा रही है और पुराने प्रपत्र मिल नहीं रहे हैं। मूल स्थान से वोटर बनने में काफी परेशानी हो रही है।
शहरी क्षेत्र के बैरियहवां के मतदाता सुधांशु कहते हैं कि वह गांव से यहां जमीन खरीदकर 20 साल पहले यहां बस गए थे। उनके दो बेटे 30 साल के हो गए हैं। पहले उनका वोट शहर और गांव दोनों जगह पर था। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उन्होंने बच्चों के फार्म में अपना विवरण अंकित किया। इसके बाद नोटिस आ गई। अब शहर से उनके पास पुराना साक्ष्य कोई नहीं है। गांव के भी वोटरलिस्ट में नाम शामिल करने के लिए वहां के पते से आईडी मांगी जा रही है। मामला फंसा हुआ है।
सुनवाई में कम आ रहे मामले
नो-मैपिंग वाले मतदाताओं को नाेटिस देने के बाद एक सप्ताह में सुनवाई करनी है। इसके लिए जिले भर में 99 एईआरओ नियुक्त किए गए हैं। 21 जनवरी से इन अधिकारियों का शिविर ब्लॉक, तहसील, पंचायत स्तर पर लगना शुरू हो गया है। पहले दिन पांच विधान क्षेत्रों में केवल 764 मामले प्रस्तुत हुए। इसमें भी साक्ष्य के अभाव में कुछ लोगों को वापस कर दिया गया। जबकि नो-मैपिंग वाले मतदाताओं की संख्या 1,13,353 है। मतदाताओं का कहना है कि यदि प्रक्रिया का सरली करण नहीं हुआ अधिकांश नो-मैपिंग वाले मतदाताओं का नाम सूची से कट जाएगा। यहां मतदाताओं की संख्या घटकर और कम हो जाएगी।
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1,13,363 मतदाताओं के सही होने पर संदेह
यहां के पांच विधानसभा क्षेत्रों में वर्ष 2025 में कुल 19,00,430 मतदाता रहे। एसआईआर प्रक्रिया में एएसडीडी श्रेणी में पाए गए 2,98,287 मतदाताओं का नाम हटा दिया गया। वर्ष 2006 की एसआईआर सूची में डिजिटलाइज्ड मतदाताओं की संख्या घटकर 16,2,143 हो गई है। इसमें भी 1,13,363 मतदाताओं के सही होने पर संदेह बना हुआ है। क्योंकि इन मतदाताओं का वर्ष 2003 की सूची से मिलान नहीं हो सका है। इन मतदाताओं को सूची में बरकरार में रखने के लिए नए सिरे से प्रशासनिक जद्दोजहद शुरू हुई है।
15.9 प्रतिशत कम हुए मतदाता
वर्ष 2025 के केंद्रीय चुनाव आयोग के निर्वाचक नामावली में बस्ती के पांच विधानसभा क्षेत्रों में कुल मतदाताओं की संख्या 19,00,430 थी। एसआईआर प्रक्रिया में इस बार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 50 हजार से अधिक मतदाता घट गए हैं। 2,98,285 यानी 15.9 प्रतिशत मतदाताओं की संख्या कम हुई है। इसमें मृतक मतदाता के अलावा दूसरे जगहों पर शिफ्टेड मतदाता और कुछ ऐसे मतदाता हैं जिनके बारे में कुछ भी पता नहीं चल सका है। इन मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया है।
75 हजार लोगों ने भरा फार्म छह
नए मतदाता बनने के लिए जिले भर से कुल 75 हजार लोगों ने फार्म छह भरकर जमा किया है। यह वह लोग जो पहली बार मतदाता बनेंगे। इसमें एक जनवरी से 1 जुलाई 2026 तक 18 वर्ष की अवधि पूरी करने वाले अर्ह माने जा रहे हैं। ऐसे युवा बीएलओ के माध्यम से फार्म छह भरकर मतदाता सूची में नाम शामिल करा सकते हैं। लेकिन, स्थान परिवर्तन कर रहने वाले इन मतदाताओं को भी साक्ष्य प्रस्तुत करने में परेशानी हो रही है।
लोग बोले-किससे मिले, कहां जाएं कुछ नहीं समझ नहीं आ रहा
मेरा नाम पहले मतदाता सूची में था। बावजूद इसके हमें एसआईआर फार्म उपलब्ध नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि अब मतदाता नहीं है। हम पढ़े लिखे भी नहीं है। मेरे पास केवल पुरानी वोटर आईडी है। मतदाता बनने के लिए किससे मिले, कहां जाएं कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
-किसमत्ता, खीरीघाटा, भटोलवा, सदर ब्लॉक।
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मेरा नाम वर्ष 2024 के मतदाता सूची में था। मैंने एसआईआर फार्म भी भरकर जमा किया है। इसके बाद हमें नो-मैपिंग की श्रेणी में रखकर नोटिस थमाई गई है। अब हमसे मेरी आईडी, माता-पिता में से किसी एक की आईडी मांगी जा रही है। विवश होकर हम परिवार रजिस्टर का नकल निकलवाने के लिए ब्लॉक तक दौड़भाग कर रहे हैं।
-पवन कुमार ओझा, खैरी ओझा, हर्रैया ब्लॉक।
कोट
नोटिस पाने वाले सभी मतदाताओं को साक्ष्य प्रस्तुत करने का भरपूर अवसर दिया जा रहा है। वर्ष 2004 के बाद जन्म लेने वाले मतदाता अपना और अपने माता-पिता में से किसी एक का आईडी साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं। वर्ष 1987 के पहले जन्म लेने वाले लोग साक्ष्य के रूप में केवल अपनी आईडी प्रस्तुत कर सकते हैं।
-प्रतिपाल सिंह चौहान, एडीएम।