सिंगल यूज प्लास्टिक : विकल्प के अभाव में प्रतिबंध बेअसर
बस्ती। शासन ने एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलिथीन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। बावजूद इसके लोग घर से थैला लेकर बाजार नहीं जा रहे। दुकानदार भी उन्हें पॉलिथीन में सामान देने से मना नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि प्रतिबंध का कोई खास असर नजर नहीं आ रहा। फल, सब्जी से लेकर किराने की दुकानों पर पहले की तरह पॉलिथीन के बैग में सामान दिए जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि इसका बेहतर विकल्प उपलब्ध होने तक पॉलिथीन का इस्तेमाल होता रहेगा। प्रशासन की उदासीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पटरी दुकानदारों से लेकर फुटकर और थोक विक्रेताओं की दुकानों में इसका इस्तेमाल खूब हो रहा है। प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक की कुल 19 वस्तुओं पर यह प्रतिबंध लगाया गया है। इनमें थर्माकोल से बनी प्लेट, कप, गिलास, कटलरी जैसे कांटे, चम्मच, चाकू, पुआल, ट्रे, मिठाई के बक्सों पर लपेटी जाने वाली फिल्म, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट पैकेट की फिल्म, प्लास्टिक के झंडे, गुब्बारे की छड़ें और आइसक्रीम पर लगने वाली स्टिक, क्रीम, कैंडी स्टिक और 100 माइक्रोन से कम के बैनर शामिल हैं।
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दुकानदार बोले, बेहतर विकल्प का इंतजार
सब्जी विक्रेता महेंद्र बताते हैं कि लोग घर से थैला लेकर ही नहीं आते, इसलिए मजबूरी में सब्जी पॉलिथीन में देनी पड़ती है। हालांकि लोगों से अपील करते हैं कि आगे से थैला लेकर आएं। किराना की दुकान चलाने वाले उदय भान ने बताया कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध होने की जानकारी है। लेकिन, इसका कोई ठोस विकल्प सामने नहीं आया। फल विक्रेता असलम ने बताया कि जूट का थैला अधिक मजबूत नहीं है और महंगा भी है। इसमें एक या दो किलो फल रखने के बाद यह नीचे से फट रहा है, लेकिन उन्होंने अपनी दुकान पर इसे रखना शुरू कर दिया है।
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ये हैं नकारात्मक प्रभाव
पॉलिथीन से जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। खाली स्थान पर डाले गए प्लास्टिक, जल के साथ रिएक्शन कर खतरनाक केमिकल्स बनाते हैं और अगर ये केमिकल्स रिसकर ग्राउंड वाटर तक पहुंच जाएं तो ये जल की गुणवत्ता को खराब कर देते हैं। पॉलिथीन के पुन: चक्रीकरण की प्रक्रिया में उच्च ताप पर गर्म करके पिघलाने पर भारी मात्रा में तरलीय गैस उत्सर्जित होती है, जिससे वायुमंडल प्रदूषित होता है। प्लास्टिक अधिक मात्रा में विषाक्त गैस जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड आदि निकालती है। 20 माइक्रोंस से कम मोटाई वाली पॉलिथीन नलियों में जाने से सीवर लाइन जाम हो जाती है।
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यह है जुर्माना, सजा
आमलोगों पर प्रतिबंधित उत्पादों का इस्तेमाल करने पर 500 से दो हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। वहीं औद्योगिक स्तर पर इसका उत्पाद, आयात, भंडारण और बिक्री करने वालों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15 के तहत दंड का प्रावधान होगा। ऐसे लोगों पर 20 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है या फिर पांच साल की जेल या दोनों सजाएं भी दी जा सकती हैं। इसके अलावा उत्पादों को सीज करना, पर्यावरण क्षति को लेकर जुर्माना लगाना, इनके उत्पादन से जुड़े उद्योगों को बंद करने जैसी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
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सख्ती से लागू करने का निर्देश
एडीएम अभय कुमार मिश्र ने बताया कि प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के लिए सभी संबंधित को निर्देश दिए गए हैं। जल्द टीम बनाकर छापा मारा जाएगा। लोगों से अपील है कि वे झोला लेकर ही बाजार जाएं ताकि पर्यावरण को बिगाड़ने वाले तत्वों से पीछा छुड़ाया जा सके।
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ये हैं सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्प
- कागज, जूट, कांच, लकड़ी आदि से बने उत्पाद।
- स्टेनलेस स्टील और बांस से बने उत्पाद ।
- पेपर बैग, जूट और नारियल जूट एवं कपड़े के बैग।
- स्टील एवं चीनी मिट्टी से निर्मित बर्तन, प्लेट, चम्मच, कप, गिलास, कंटेनर, बाटल शामिल।
- पेपर प्लेट, दोना-पत्तल, पत्तों से निर्मित सामग्री।
- केले के तने, नारियल के पत्तों से निर्मित प्लेट एवं कप, मग।
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