हर्रैया। उभाई में सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ बृहस्पतिवार को कलश पूजन व मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से किया गया। अयोध्या के कथा वाचक भुनेश्वरानंद शास्त्री ने पहले दिन कथा के महात्म्य का रसपान कराया। कहा कि यह कथा मृत्यु के भय से मुक्ति का मार्ग दिखाती है।
कथा श्रवण से जीवों के जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। जीवन में ज्ञान वैराग्य व भक्ति का संचार होता है। आगे कहा कि राजा परीक्षित को कथा सुनने के बाद मृत्यु का भय समाप्त हो गया था। उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य के जीवन में पुण्य का उदय होता है तब उसे श्रीमद्भागवत कथा श्रवण का पुण्य अवसर प्राप्त होता है। भागवत कथा सभी वेद व पुराणों का सार है। कथा सुनने व सुनाने वालों के साथ ही जिस क्षेत्र में कथा होती है वहां के लोगों का भी कल्याण होता है। मुख्य यजमान शिवकुमारी एवं चंद्रशेखर उपाध्याय ने व्यास पीठ की आरती उतारी।
शांति देवी, शरद, चन्द्र कमल, रामपाल उपाध्याय, महेंद्र, अनिरुद्ध, मनोज आदि मौजूद रहे।