बस्ती। श्री बाबा झुंगीनाथ धाम में सात दिवसीय श्रीराम महायज्ञ संत सम्मेलन में व्यासपीठ से प्रीती पांडेय ने कहा कि श्रीराम का जन्म और कर्म दोनों मंगलकारी है। नर लीला के रूप में श्रीराम ने संसार को उपदेश दिया कि किस प्रकार से माता, पिता, पत्नी, भाई के साथ संबंध का निर्वाह कर अत्याचार का बिना सेना के प्रतिरोध किया जाय।
डॉ. अवधेश महाराज ने कहा कि रामचरित मानस में संसार के सभी प्रश्नों का हल निहित है। प्रयागराज और नदियों की महिमा का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि श्रीराम कथा से जीवन सुधरता है। श्रीराम के बाल चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि परमात्मा की प्राप्ति के लिए युगों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। जब-जब संसार में अधर्म की वृद्धि होती है ईश्वर विविध रूप में अवतार लेकर मनुष्य को सद्मार्ग दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि परमात्मा सत्कर्म में सहायक होते हैं। ईश्वर की धर्म मर्यादा का उल्लंघन करने पर भक्ति सफल नहीं हो सकती। परमात्मा स्वयं कहते हैं तप और विद्या अति उत्तम है, उसे यदि विनय, विवेक का सहारा न मिले तो व्यर्थ है। यदि भक्ति शुद्ध है तो ज्ञान और वैराग्य दौड़े-दौड़े आएंगे। इस मौके पर आयोजक ध्रुवचंद्र पाठक ने विधि विधान से आचार्यों का पूजन किया।