कांवड़ पर्व - सज कर तैयार है बाबा का धाम भद्रेश्वरनाथ मंदिर
- संकल्पित जल लेकर अयोध्या से लौट रहे कांवड़ियां
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। श्रावण तेरस के दिन शिव अभिषेक के लिए राम की सरयू अयोध्या से कंधे पर सवार होकर चल दी है। श्रद्धालु नंगे पांव रास्ता नाप रहे हैं। अटूट भक्ति उनके सिर चढ़ी हुई है। महर्षि वशिष्ठ की बस्ती से लेकर प्रभु राम की अयोध्या तक श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा है। 70 किलोमीटर तक सिर्फ भगवाधारियों की बमबम है। शिवमय हो चुके हाईवे पर सिर्फ बोल बम गूंज रहा है। श्रद्धालुओं में भोले की भक्ति का जुनून है तो कांवड़ में मां सरयू की शक्ति है। इसी के सहारे शिव भक्त नंगे पैर कंकर, पत्थर को रौंदते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इधर बाबा का धाम भद्रेश्वरनाथ भी सज धजकर उनकी श्रद्धा सबूरी को स्वीकारने को तैयार है।
सरयू के पवित्र तट से संकल्पित जल लेकर चलने का सिलसिला अभी अगले दो दिनों तक चलेगा। 12 जुलाई से ही शिवभक्तों का जत्था अयोध्या के लिए कूच करना शुरू कर दिया है। इसी दिन देर शाम से पवित्र सरयू के तट से जल से लेकर शिवभक्त पैदल चलने लगे हैं। बड़ी संख्या में कांवड़िए जनपद के घघौवा, छावनी, हर्रैया, संसारीपुर, महराजगंज में पड़ाव बना रहे हैं। इन जगहों पर कुछ देर के विश्राम के बाद फिर आगे की यात्रा शुरू हो जा रही है। बृहस्पितवार को को फोरलेन के एक तरफ से कांवड़ियों का जल लेने के लिए अयोध्या जाने का सिलसिला जारी रहा। दूसरे लेन पर लौटने वाले कांवड़ियों की बमबम रही। एक दिन पहले कांवड़ लेकर यात्रा प्रारंभ करने वाले श्रद्धालुओं का कई जत्था हर्रैया, महराजगंज तक पहुंच चुका है। देर रात यह कांवड़िए बस्ती के करीब डेरा जमाएंगे। 14 जुलाई की सुबह से बाबा भद्रेश्वरनाथ धाम में कांविड़यां पहुंचना शुरू कर देंगे। इस दिन भद्रेश्वर नाथ मंदिर और अयोध्या के बीच सड़क पर सिर्फ कांवड़ियां ही नजर आएंगे।
पैरो में छाले, चेहरों पर थकान फिर भी शिवभक्ति भारी
कांवड़ियों के पैर चलते-चलते ओझल हो जा रहे हैं। पांच से दस किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद से ही तलवे में न जाने कितने छाले पड़कर फूट रहे हैं। तीन दिनाें तक सड़क पर ही रहना, खाना और सोना है। चेहरों पर थकान भी साफ झलक रही है। इन सब के बावजूद शिवभक्ति भारी पड़ रही है। पूरे उत्साह से श्रद्धालुओं के बोझिल पैर बोल बम की गूंज में शिवधाम की ओर बढ़ते जा रहे हैं। भक्ति की इस कड़ी परीक्षा का दृश्य देख हर किसी का मन विह्वल हो रहा है।
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हाईवे पर सेवादारों ने किए इंतजाम
कुछ भोले भक्त सेवादार की भूमिका में कांवड़ पर्व को भव्यता प्रदान कर रहे हैं। हाईवे पर जगह-जगह उनके राहत शिविर लगाए गए हैं। यहां पैदल पहुंचने वाले कांवड़ियों के जलपान, भोजन आदि की व्यवस्था है। सेवादारों की तरफ से राहत शिविरों में रूकने का अनुरोध किया जा रहा है। घघौवा, विक्रमजोत, छावनी, हर्रैया, महराजगंज, कप्तानगंज, तिलकपुर में कांवड़ मार्ग के किनारे शिविर लगाकर सेवादार मुस्तैद हैं।
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भजन, कीर्तन की मची हैं धूम
कांवड़ मार्ग पर डीजे की धुन पर भजन, कीर्तन की धूम मची है। इस बार शिव शंकर की इस भक्ति परीक्षा में महिलाएं भी अच्दी तादाद में शामिल हैं। वह रास्ते भर मंगलगान करते हुए चल रही है। डीजे से गूंज रहे भजन गायकों के स्वर पर शिवभक्त नाचते थिरकते हुए चल रहे हैं। वहीं फुटहिया में शिवभक्तों के लिए व्यापक इंतजाम किया गया है। सेवादारों ने यहां बृहस्पतिवार से ही लंगर शुरू करा दिया है। शुक्रवार को भजन सम्राट हंसराज रघुवंशी भी कांवड़ियों के बीच पहुंचेंगे। वह शिव भजनों की बौछार करेंगे। इसके लिए फुटहिया ओवरब्रिज के निकट भव्य पंडाल सजाया गया है।
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आज आधी रात से शुरू होगा जलाभिषेक
बाबा भद्रेश्वरनाथ धाम में शुक्रवार की आधी रात से जलाभिषेक शुरू हो जाएगा। यहां लगभग पांच लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। जल चढ़ाने का सिलसिला शनिवार की शाम तक रहेगा। इसीलिए प्रशासन भी अलर्ट है। कांवड़ पर्व की तैयारियां लगभग अंतिम चरण में है। कहीं से कोई व्यवधान न हो इसको लेकर प्रशासन हलकान है।
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बैरिकेडिंग से हो सकती है अव्यवस्था
भद्रेश्वरनाथ मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को बैरकेडिंग का सामना करना होगा। यहां मंदिर से करीब तीन सौ मीटर दूर जिकजैक लोहे की बैरिकेडिंग है। इससे थोड़ी दूर आगे चलने पर बल्लियों का जिकजैक बैरिकेडिंग है। इन्हीें बैरिकेडिंग से होकर प्रत्येक कांवड़ियों को मंदिर तक पहुंचना है। लाखों की तादाद को बैरिकेड कर बनाई दो से ढाई फिट की गैलरी में चला पाना कठिन लग रहा है। वहीं नगर, बेलाड़ी, देवराव के रास्ते मोहटा होकर आने वाले कांवड़ियों के मंदिर में प्रवेश की व्यवस्था नहीं बनी है। यह रास्ता मंदिर के पास सीलबंद कर उस क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों का कारिडोर बना दिया गया है।