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शंभूपाल हत्याकांड : नौ साल पहले जिला न्यायालय ने रामकरन आर्य को सुनाई थी उम्रकैद की सजा

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बस्ती। शंभूपाल हत्याकांड में करीब 22 साल तक चली सुनवाई के बाद 10 अप्रैल 2017 को जिला न्यायालय ने तत्कालीन सपा विधायक और पूर्व मंत्री रामकरन आर्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस मामले में नामजद 10 आरोपियों में से एक की मौत हो चुकी थी। शेष नौ आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई, जिसमें आठ को दोषमुक्त कर दिया गया था। जिला न्यायालय ने रामकरन आर्य को दोषी ठहराया गया था। अब हाईकोर्ट की डबल बेंच ने उम्रकैद की जगह दस साल की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट के फैसले से छह महीने बाद उनके रिहा होने की उम्मीद है।
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चार बार विधायक और तीन बार मंत्री रहे रामकरन आर्य

रामकरन आर्य सपा सरकार में आबकारी एवं खेलकूद विभाग के राज्य मंत्री रहे थे। वह चार बार विधायक चुने गए और तीन बार मंत्री बने। वर्ष 1989 में जनता दल के टिकट पर नगर पूरब अब महादेवा सीट से चुनाव जीतकर उन्होंने विधानसभा में प्रवेश किया। वर्ष 1993 में वह सपा में शामिल हो गए और चुनाव जीते। इसके बाद 2002 और 2012 में भी सपा के टिकट पर विधायक बने। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

24 नवंबर 1994 को सुभाष तिराहे पर हुई थी हत्या

भाजपा के वर्तमान सांसद जगदंबिका पाल के चचेरे भाई और भरवलिया गांव निवासी शंभूपाल की 24 नवंबर 1994 को बस्ती के सुभाष तिराहे पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय शंभूपाल वाल्टरगंज में आयोजित किसान गोष्ठी में शामिल होने जीप से जा रहे थे। इसी दौरान उनकी जीप की रामकरन आर्य के वाहन से टक्कर हो गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई और विवाद बढ़ गया। आरोप था कि तत्कालीन विधायक रामकरन आर्य ने अपने गनर की बंदूक छीनकर शंभूपाल को गोली मार दी थी। इस मामले में लंबे समय तक सुनवाई चली और अंततः अदालत ने रामकरन आर्य को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
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बेटे शिव बहादुर पाल ने की थी मुकदमे की पैरवी

शंभूपाल की हत्या के मामले में उनके बेटे शिव बहादुर पाल ने अदालत में मुकदमे की पैरवी की थी। 10 अप्रैल 2017 को फैसला सुनाए जाने के दौरान दीवानी न्यायालय परिसर के बाहर बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। फैसला आने के बाद शिव बहादुर पाल ने कहा था कि पिता की हत्या की साजिश के आरोप में आरोपी को सजा मिलने के बाद उन्हें कुछ राहत महसूस हुई है।े
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