एमपी/एमएलए कोर्ट ने बीस साल पुराने मामले में पूर्व विधायक संजय प्रताप जायसवाल और पूर्व विधायक आदित्य विक्रम सिंह समेत सात लोगों को तीन-तीन वर्ष की कारावास की सजा सुनाई है। 4500-4500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न जमा करने पर दो माह 10 दिन की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सभी दोषी अदालत में मौजूद थे। कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई है। सभी ने जनपद न्यायालय में अपील करने की बात कही है।
सभी पर आरोप था कि तीन दिसंबर 2003 को एमएलसी चुनाव की मतगणना के दौरान 50-60 समर्थकों के साथ पहुंचे और मतगणना में व्यवधान डाला। 50 मतपत्र उठा ले गए और मौजूद सीओ से विवाद किए। एआरओ की तहरीर पर कोतवाली में केस दर्ज कराया गया था। सभी पक्षों के सुनने के बाद अब अदालत ने फैसला सुनाया है। एक आरोपी की मौत हो चुकी है।
न्यायालय में शासकीय अधिवक्ता देवानंद सिंह और रश्मि त्रिपाठी ने बताया कि तीन दिसंबर 2003 को शहर के तहसील भवन में एमएलसी चुनाव की मतगणना की जा रही थी। दोपहर करीब पौने चार बजे प्रत्याशी कंचना सिंह और उनके पति पूर्व विधायक आदित्य विक्रम सिंह निवासी अठदमा थाना रुधौली, पूर्व विधायक संजय प्रताप जायसवाल निवासी पांडेय बाजार थाना पुरानी बस्ती, मोहम्मद इरफान निवासी डुमरियागंज थाना डुमरियागंज जिला सिद्धार्थनगर, अशोक सिंह निवासी ग्राम पड़री थाना रुधौली, बृजभूषण सिंह पूर्व प्रमुख निवासी ग्राम पिपरा संसारपुर थाना वाल्टरगंज, महेश सिंह पूर्व प्रमुख निवासी ग्राम डुहवा थाना गौर, त्रयंबक नाथ पाठक पूर्व प्रमुख निवासी तक्कीपुर थाना परशुरामपुर 30/40 समर्थकों के साथ पहुंचे।
इन लोगों ने मतगणना में व्यवधान किया और 50 मतपत्र उठा ले गए। ड्यूटी पर तैनात सीओ ओमप्रकाश सिंह से कहासुनी की। इस संबंध में मतगणना के एआरओ की शिकायत पर कोतवाली में केस दर्ज किया गया था। इस केस में 10 गवाह प्रस्तुत किए गए। गवाहों ने घटना का समर्थन किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सात आरोपियों को दोषी मानते हुए दंडित किया है। आठवें आरोपी पूर्व ब्लॉक प्रमुख बृजभूषण सिंह की मौत हो चुकी है।