भानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के बीएससी एग्रीकल्चर चतुर्थ वर्ष के छात्र कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़कर आरएडब्ल्यूई (रूरल एग्रीकल्चर वर्क एक्सपीरियंस) कार्यक्रम के तहत अनुभव हासिल करने गांवों में जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को वे रामनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत लोढ़वा के नाथपुर मजरे में पहुंचे।
छात्रों में शामिल प्रशांत बताते हैं कि किसानों से खेती के पारंपरिक तौर-तरीके सीखे और उन्हें कम लागत में लाभदायक फसलों की जानकारी दी। प्रशांत ने बताया कि तिल 90 दिन में तैयार होने वाली फसल है। इसमें सिंचाई की जरूरत भी बहुत कम पड़ती है। बाजार में तिल के तेल की बढ़ती मांग को देखते हुए किसान इस फसल की पैदावार से आसानी से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। इस मौके पर गांव के कई किसान मौजूद रहे। संवाद