बस्ती। नवरात्र के महाष्टमी पर बृहस्पतिवार को इन मंत्रों से महागौरी की पूजा की गई। दिन भर मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। प्रतिपदा और महाष्टमी का व्रत रखने वाले देवी भक्तों ने व्रत रखा। बृहस्पतिवार को नवमी पर नौ दिन के व्रत रखने वाले हवन की तैयारियां कर रहे हैं।
खास कर हवन सामग्री और हवन कराने वाले आचार्य की तलाश पहले ही शुरू हो गई है। अधिकतर लोग अपने कुल गुरु या स्थानीय मंदिर के पुजारी से हवन कराते हैं। कुछ पंडित यजमान के घर जाकर हवन कराते हैं। जबकि कई लोग मंदिर पर होने वाली सामूहिक हवन में भाग लेते हैं। शहर के गायत्री मंदिर के सामूहिक हवन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। नौ दिन व्रत रखने वाले कन्या पूजन भी करेंगे।
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हवन और पारण का शुभ समय
- धर्म-कर्म के ज्ञाता और कर्मकांड के विद्वान पं. मोहित मिश्र के अनुसार नवरात्र के नौंवे दिन यानि 30 मार्च बृहस्पतिवार को हवन करने के लिए प्रात:काल 08:38 से लेकर 10:32 बजे के शुभ मुहूर्त है। जबकि दशमी तिथि यानि 31 मार्च शुक्रवार के दिन इस व्रत का पारण करने के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त प्रात:काल 07:30 से 08:30 बजे तक रहेगा।
कब करें नवरात्र व्रत का पारण
सनातन परंपरा के अनुसार नवरात्र में व्रत पारण कन्या पूजने के बाद और कलश विसर्जन के बाद किया जाता है। यदि कन्या पूजन और हवन कर लिया है तो आप कलश विसर्जन के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं। वहीं, जो लोग नवमी तिथि को हवन और कन्या पूजन करते हैं वे कल ही कलश विसर्जन करके फिर ही व्रत का पारण कर सकते हैं।
नदियों में श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी
- नवमी के दिन श्री राम पूजा का मुहूर्त शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 11 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इस बार कई शुभ संयोग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग और गुरु पुष्य योग बन रहा है। इस दिन पूरे दिन खरीदारी का भी शुभ मुहूर्त रहेगा। माना जाता है कि राम नवमी के दिन शुभ मुहूर्त में कुछ चीजें खरीदने से भक्तों पर प्रभु राम की कृपा बरसती है।
राम नवमी पर सरयू, मनोरमा व कुआनों नदी के कई घाटों पर श्रद्धालु स्नान-दान करते हैं। कई जगह मेले भी लगते हैं। हर्रैया कस्बे के मनोरमा घाट पर और बैरवा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करेंगे। सिसई उभईं, नागवीर, जगदीशपुर, ज्ञानपुर, पूरे लेखई, पूरे बैजू, शेरवाडीह, सेंदुरिया घाट, लजघटा, रानी गांव, आमा, जीजी रामपुर समेत अन्य गांवों के लोग वहां आस्था की डुबकी लगाएंगे। हर्रैया प्रतिनिधि के मुताबिक, कोहले गांव में सम्मय माता के मंदिर, परमहंस बाबा के मंदिर के अलावा अमारी बाजार बैरवा घाट, सेंदुरिया, बासगांव, रानीगांव, अजगरा, अशोकपुर, हुड़रा कुंवर, बरहपुर कुंवर, पखेरी, लजघटा समेत अन्य गांवों के लोग मेले में भाग लेते हैं। गौर प्रतिनिधि के मुताबिक कोटही सम्मय माता के स्थान, हलुआ सम्मय माता मंदिर, हलुआ सम्मय माता के स्थान, केसरई, बलुआ, मुसहा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भीड़ जुटती है।