बस्ती। राष्ट्रीय राजमार्ग की पटरियों की सफाई के लिए बड़ी संख्या में सफाई कर्मी लगाए गए हैं। जो हफ्तेभर से पटरियों की सफाई का काम कर रहे हैं। फिर भी यह साफ नहीं दिख रही हैं। कर्मी पटरियों पर उगी झाड़ियों को फूंक दे रहे हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब होने के साथ परिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता पर खतरा मडरा रहा है।
उल्लेखनीय है कि जनपद में हाईवे सांऊघाट, सदर, कप्तानगंज, हर्रैया व विक्रमजोत ब्लॉक क्षेत्र से गुजरता है। बारिश के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पटरियों और मार्ग की सफाई नहीं कराया। अब जब अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर प्रशासन ने तैयारी शुरू की तो सबसे पहले पटरियों की सफाई पर ध्यान गया। जिसके लिए उक्त पांच ब्लॉकों के सफाई कर्मी लगाए गए हैं। जो जिले की सीमा के अंदर पटरियों की सफाई कर रहे हैं। मंगलवार को हमने सफाई को लेकर हाईवे की पड़ताल की तो करीब दर्जनभर जगहों पर झाड़ियां फुंकी मिलीं। कुछ जगहों पर यह जलती हुई भी दिखीं। पूछने पर कर्मियों ने बताया कि यह सूख गई हैं फावड़े से कट नहीं रहीं हैं, मजबूरी में फूंकना पड़ रहा है। पड़ताल में हमें गड़हा गौतम, रमवापुर जेब्रा कॉसिंग, खुजहा, तिलकपुर, गोटवा, बिरजा, रजौली, संसारीपुर, तेनुआ, हर्रैया, भदवाल, बिहरा गेट आदि जगहों पर पटरियों पर झाड़ियों जली हुई मिलीं। जबकि भदावल गांव के सामने और संसारीपुर फायर स्टेशन के पास झाड़ियों में आग जलती हुई दिखी।
हवा की गुणवत्ता हो रही खराब
कड़ाके की ठंड से परेशान जनपदवासी अब हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंतित हैं। हफ्तेभर से शीतलहर और धुंध से लोग परेशान हैं। इसी बीच हवा की गुणवत्ता भी खराब हो गई है। दो दिनों से सीजन का सर्वाधिक प्रदूषण सोमवार और मंगलवार दर्ज हुआ। मंगलवार को भी एक्यूआई 189 दर्ज हुआ। हाईवे पर जलाई जा रहीं झाड़ियां हवा को प्रदूषित करने का काम कर रही हैं।
जैव विविधता और परिस्थितिकी तंत्र को पहुंच रही हानि
शिव हर्ष किसान पीजी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर शिवेंद्र मोहन पांडेय बताते हैं कि हाइवे की झाड़ियों में विभिन्न प्रकार के जीव जैसे गिलहरी, गिरगिट, नेवला, शाही, खरगोश के साथ तमाम मित्र कीट व पक्षी भी रहते हैं। आग के कारण यह जीव या तो मर जाएंगे या अपना घर छोड़कर अन्यत्र कहीं चले जाएंगे। इससे परिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होगा। वन्य जीव, पुष्पीय व औषधीय पादप, कीट पतंगे, तितलियां, भूमिगत जीव जैव विविधता का हिस्सा हैं। यह पर्यावरण में संतुलन बनाए रखने में मददगार हैं। झाड़ियों को फूंकने से पर्यावरण संतुलन प्रभावित होगा।