कप्तानगंज। आंगनबाड़ी में नौकरी दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार सफाईकर्मी शिवमूरत गौंड़ को एडीओ पंचायत की रिपोर्ट पर डीपीआरओ ने निलंबित कर दिया है। शुक्रवार को ब्लॉक से लेकर आंगनबाड़ी कार्यालय में सन्नाटा रहा। कार्रवाई से बचने के लिए कई कर्मचारी मोबाइल बंद कर भाग गए हैं।
इधर, पीड़ित विनय कुमार वर्मा ने बताया कि सीडीपीओ कार्यालय के बाबू और सफाईकर्मी ने नियुक्ति को लेकर 50 हजार की मांग की थी। आरोप है कि, असमर्थता जताने पर बाबू ने गांव के विपक्ष के लोगों से आपत्ति लगवा दी थी। कप्तानगंज ब्लॉक के बढ़या गांव के रहने वाले पीड़ित विनय ने बताया कि दिसंबर 2025 में सीडीपीओ कार्यालय के बाबू और आरोपी शिवमूरत ने 50 हजार की डिमांड की थी। जब पैसा देने में असमर्थता जताई तो उन लोगों ने गांव के विपक्ष के लोगों से आपत्ति लगवा दी थी। आपत्ति का निस्तारण होने के कारण विनय की पत्नी सोनी वर्मा का चयन भी हो गया।
पीड़ित ने बताया कि अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में शैक्षिक प्रमाणपत्र का सत्यापन कराने के बाद सफाईकर्मी ने ब्लॉक पर बुलाया था। अपने फोन से कार्यालय के बाबू से बात कराई थी। आरोप है कि बाबू ने शिवमूरत को पैसा देने की बात कही थी। सफाईकर्मी ने बताया कि रुपये उच्चाधिकारियों तक पहुंचाना पड़ता है अगर पैसा नहीं दोगे तो नियुक्तिपत्र नहीं मिलेगा। पीड़ित ने बताया कि सफाईकर्मी लगातार विनय के मोबाइल पर रुपये की डिमांड करने लगा। विनय ने मजबूरी बताई तो दो किस्तों में पैसा देने की बात पर तैयार हुआ। पीड़ित ने बताया कि गूगल से एंटी करप्शन का नंबर सर्च करके लखनऊ हेड ऑफिस से संपर्क साधा। उसके बाद एंटी करप्शन बस्ती से बुलाया गया। सबूत के तौर पर शिवमूरत का वाइस रिकॉर्डिंग देना पड़ा। 13 मई को एंटी करप्शन टीम ने शिकायत दर्ज करते हुए अपना जाल बिछाया। टीम ब्लॉक मुख्यालय पर कई दिनों से रेकी कर रही थी लेकिन बृहस्पतिवार को 25 हजार रुपया लेते हुए सफाईकर्मी को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
एंटी करप्शन प्रभारी उदय प्रताप यादव ने बताया कि शुक्रवार को आरोपी सफाईकर्मी शिवमूरत को न्यायालय भेज दिया गया। मामले में विवेचना भी शुरू हो गई है।
बाबू और सफाईकर्मी की सेटिंग से होती थी नियुक्ति
सीडीपीओ कार्यालय में एक बाबू 10 साल से अधिक समय से तैनात है। पूरे ब्लॉक में उसने अपना जाल बिछाया है। हर ग्राम पंचायत में उसके कमीशन एजेंट हंै। सफाईकर्मी भीआंगनबाड़ी कार्यालय का दिन भर चक्कर काटता था। सूत्रों की मानें तो नियुक्ति से संबंधित गोपनीय अभिलेख भी बाबू और सफाईकर्मी के पास ही रहता था। बाबू अपने सहयोगियों के साथ जाति, आय, निवास आदि प्रमाणपत्रों में त्रुटि खोजकर सेकेंड मेरिट वालों से आपत्ति करा देता था। उसके बाद कीमत वसूलता था।