बस्ती। बिजली निगम में लाइनमैनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। फाल्ट दुरुस्त करने वाले कई संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मी बिना सुरक्षा उपकरणों के ही विद्युत पोल पर चढ़कर काम कर रहे हैं। नियमानुसार उन्हें हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, सुरक्षा जूते, रबर के दस्ताने समेत जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाने चाहिए, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। हादसा होने पर कर्मचारियों की जान तक चली जा रही है, फिर भी जिम्मेदारों की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।
जिले में चार विद्युत वितरण खंड हैं। इनके करीब चार लाख उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने और फाल्ट दुरुस्त करने की जिम्मेदारी लाइनमैनों पर है। जिले में करीब 508 लाइनमैन कार्यरत हैं। इनमें 204 कुशल और 304 अकुशल श्रमिक हैं। इसके अलावा नियमित लाइनमैन और एसएसओ की संख्या 111 बताई गई है। जिले में 38 विद्युत उपकेंद्र हैं।
बारिश के मौसम में बिजली फाल्ट की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में लाइनमैनों को लगातार पोल पर चढ़कर काम करना पड़ता है। कई कर्मचारी सीढ़ी के सहारे 30 से 40 फीट ऊंचे पोल पर बिना सेफ्टी बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के काम करते हैं। इससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
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टेंडर की शर्तों में सुरक्षा किट, फिर भी अनदेखी
संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों से काम लेने वाली एजेंसियों के लिए सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना टेंडर की शर्तों में शामिल है। नियम के अनुसार लाइनमैन को रबर के दस्ताने, प्लास, पेचकस, टेस्टर, सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और सुरक्षा जूते आदि उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसके बावजूद कई कर्मी बिना सुरक्षा किट के ही काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार उन्हें अपने स्तर से सुरक्षा जूते और अन्य जरूरी सामान खरीदना पड़ता है। हादसा होने की स्थिति में भी उन्हें अपेक्षित मदद नहीं मिल पाती। कई बार कर्मचारी आपस में चंदा जुटाकर घायल अथवा मृतक कर्मचारी के परिवार की मदद करते हैं।
सुरक्षा किट स्टोर में, कर्मी कर रहे इस्तेमाल का इंतजार
बिजली श्रमिक नेता अशर्फीलाल का आरोप है कि संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते। कागजों में ईएसआई समेत अन्य सुविधाएं दर्ज हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है। उनका कहना है कि जिला श्रम समिति की बैठक भी नियमित नहीं होती। कर्मचारियों की ओर से कई बार मामला उठाए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा किट स्टोर में पड़ी रहती है और हादसा होने के बाद उसे बाहर निकालकर औपचारिकता पूरी की जाती है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई का दबाव भी रहता है।
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नियम में लाइनमैन को ही पोल पर चढ़ने की व्यवस्था
विद्युत कार्य में सुरक्षा मानकों के तहत प्रशिक्षित कर्मी को ही आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के साथ पोल पर चढ़कर काम करना चाहिए। आरोप है कि कई स्थानों पर संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों से भी विद्युत पोल पर चढ़कर काम कराया जा रहा है। छोटे-बड़े फाल्ट होने पर इन्हीं कर्मियों को मौके पर भेज दिया जाता है। संविदा कर्मियों के लिए नियमानुसार ईपीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं। इससे दुर्घटना की स्थिति में उपचार और अन्य सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकता है। कर्मचारियों का आरोप है कि सुरक्षा उपकरणों की कमी के साथ ही इन सुविधाओं को लेकर भी प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है।
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ये सुरक्षा किट अनिवार्य
नियमानुुसार इन कर्मचारियों को रबर के दस्ताने, प्लास, पेंचकस, टेस्टर, झूला, सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट, जूता अनिवार्य है। सुरक्षा के बिना ही 30 से 40 फीट ऊचाई पर काम करने वाले कर्मचारी बिना सेफ्टी बेल्ट के काम करते हैं। नियमानुसार संविदा कर्मचारियों को ईपीएफ, ईएसआई की सुविधा मिलनी चाहिए। इससे हादसे होने पर उन्हें सरकारी मदद के साथ इलाज की सुविधा मिल सके। हादसा होने पर कर्मचारी चंदा एकत्रित कर आपस में मदद करते हैं। अधिकांश कर्मी अपने पैसे ही पोल पर चढ़ने वाला जूता और अन्य सामग्री मंगवा चुके हैं।
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संसाधन व मैनपावर पर एक नजर
कुशल श्रमिक : 204
अकुशल श्रमिक : 304
नियमित लाइनमैन व एसएसओ : 111
विद्युत उपकेंद्र : 38
कुल लाइनमैन/श्रमिक : 508
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केस-1 : पोल से गिरकर गंभीर घायल
16 अगस्त को गांधीनगर क्षेत्र में सबदेइया कला निवासी 54 वर्षीय अकुशल श्रमिक विनय श्रीवास्तव काम के दौरान पोल से नीचे गिर गए। बताया गया कि उनके पास सुरक्षा किट नहीं थी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका उपचार लखनऊ में चल रहा है।
केस-2 : हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर मौत
दो अगस्त को बहादुरपुर विद्युत उपकेंद्र की 11 केवी लाइन पर काम करने के दौरान सपहा गांव निवासी राजू उपाध्याय की मौत हो गई थी। वह निजी लाइनमैन के तौर पर काम करते थे। आरोप है कि विभागीय कर्मचारियों के कहने पर वह लाइन ठीक करने पहुंचे थे। सुरक्षा उपकरणों के अभाव में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
कोट
पोल पर बिना सुरक्षा किट चढ़कर काम न करने की ट्रेनिंग दी जाती है। किट उपलब्ध है, लेकिन कई कर्मचारी उसका उपयोग नहीं करते। एजेंसियों को भी नियमित दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। जेई को भी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
-खालिद सिद्दीकी, एसई, बस्ती।