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Basti News: सच्चिदानंद की दलीलें नहीं आईं काम, शिष्य ने भी मढ़े आरोप

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दो मामलों में आरोप तय, दो के लिए छह मार्च को फिर होगी सुनवाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती।
संत कुटीर आश्रम में साध्वियों के यौन शोषण के आरोपी कथित बाबा सच्चिदानंद ने अपने ऊपर लगे आरोपों से बचने के लिए तमाम दलीलें पेश की लेकिन कोई काम नहीं आईं। न्यायालय ने पीड़िताओं के कलमबंद बयान और पुलिस की तफ्तीश के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के मद्देनजर उसके और उसके सहयोगियों के खिलाफ केस के ट्रायल का निर्णय लिया। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम विजय कुमार कटियार की अदालत ने अन्य दो केस में सभी आरोपियों के मौजूद न होने के कारण छह मार्च की तारीख तय कर दी है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता वेद पांडेय ने पीड़िता की ओर से कहा कि आरोपी की ओर से जघन्य अपराध कारित किया गया है। सभी धाराओं आरोप बनाया जाए, जिससे दोबारा कोई ऐसा अपराध न कर सके। बाबा सचिदानंद व अन्य आरोपियों की ओर से अधिवक्ता राकेश मिश्रा ने न्यायालय में तर्क दिया कि यह पूरी घटना काल्पनिक व झूठी है। बाबा की सेल्हरा गांव में स्थित आश्रम व उसकी जमीन को हड़पने के लिए साजिश के तहत केस दर्ज कराया गया है। यह सभी निर्दोष हैं। आरोपी बाबा 80 साल के बुजुर्ग हैं। इनके सभी आरोप निराधार हैं। न्यायाधीश विजय कुमार कटियार की अदालत ने दोनों पक्षाें की दलील सुनने के बाद आरोप बनाते हुए दो केस में गवाही के लिए तिथि नियत कर दी है।
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आपराधिक कृत्यों में लिप्त है कथित बाबा
उधर, बाबा सच्चिदानंद के खास शिष्य रहे लालगंज थानाक्षेत्र के सेल्हरा निवासी तपस्यानंद उर्फ श्याम चंद चौधरी ने पुलिस अधिकारियों तक पहुंच कर बाबा पर तमाम आरोप मढ़े। तपस्यानंद ने बताया कि बाबा का वेश धारण करके सच्चिदानंद अपराधिक कार्यों में लिप्त है। उसने अलग-अलग स्थानों पर जाकर अलग नाम से आधार कार्ड बनवा रखा है। अपने खास लोगों के सहयोग से आश्रम के नाम पर जमीनें हड़प लेता है। यहां तक कि बाबा का विरोध करने पर उसे ही बंधक बना लिया गया था। पुलिस ने सच्चिदानंद और उसके सहयोगियों पर बार बार आवेदन देने के बावजूद गैंगस्टर नहीं लगाया।
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यह है मामला
दिसम्बर 2017 में यौन शोषण का मामला तब प्रकाश में आया था, जब आश्रम से कुछ युवतियों को धक्के मारकर निकाले जाने की बातें सामने आईं। आश्रम की अन्य महिलाओं के साथ किसी तरह छिपते हुए डरी-सहमीं ये महिलाएं उस समय एसपी दफ्तर पहुंचीं, जब अन्य अधिकारी जा चुके थे। वहां मौजूद अधिकारियों को जब युवतियों ने आप बीती सुनाई तो वह दंग रह गए। इसी बीच तत्कालीन कोतवाल विजयेंद्र सिंह महिला पुलिस के साथ पहुंचे और पीड़ितों को बयान के लिए कोतवाली ले गए। तत्कालीन एसपी संकल्प शर्मा के निर्देश पर देर रात कथित बाबा के अलावा उसके तीन शिष्यों परमचेतानंद, विश्वासानंद, ज्ञान वैराग्यानंद तथा दो मुख्य सेविकाओं पर 2008 से लगातार यौन शोषण व गैंगरेप का केस दर्ज किया गया। पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि सत्संग व प्रवचन के नाम पर महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों को आश्रम में बुलाया जाता है। उनमें से पसंद की लड़कियों को साध्वी का दर्जा देकर आश्रम में रख लिया जाता है। उन्हें अनुष्ठान के जरिए विशेष कृपा दिलाने का दिलासा देते थे। उनका विश्वास जीतने के बाद दिल्ली स्थित आश्रम के मुख्यालय अथवा यहां के कथित बाबा व चेलों के निर्देश पर उन्हें अलग-अलग शहरों में प्रवचन- सत्संग के बहाने भेजकर उनका यौन शोषण किया जाता।
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