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रुधौली कांड: गायब हो गए मददगार, मदद से महरूम हैं दंपती के बच्चे

Wed, 20 Dec 2023 11:17 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती, रुधौली। रुधौली के दंपती की खुदकुशी की घटना के समय परिवार व बच्चों की मदद करने का दावा कर वाहवाही लूटने वाले नेपथ्य में जैसे गायब हो गए। तीन महीने बाद भी परिवार को मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिल सका। इससे बच्चों काे स्कूल में न तो प्रवेश मिल पाया और न ही सरकारी सहायता। दोनों बच्चे और परिवार के लोग अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। एसडीएम रुधौली आशुतोष तिवारी ने बताया कि दंपती का मृतक प्रमाणपत्र गोरखपुर से जारी कराने के लिए राजस्व कर्मी को निर्देश दिए गए हैं। इसी सप्ताह प्रमाणपत्र परिजनों को दिलवा दिया जाएगा।
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रुधौली नगर पंचायत के शास्त्री नगर वार्ड में 21 सितंबर को एक दंपती ने कीटनाशक खा लिया था। 24 घंटे के भीतर पति-पत्नी की मौत हो गई थी। पति की मौत जिला अस्पताल में और पत्नी की मौत गोरखपुर मेडिकल काॅलेज में हुई थी। दोनों की मौत के कुछ ही देर बाद एक-एक करके कई वीडियो सामने आए जिनमें दंपती ने वार्ड के ही नाबालिग सहित एक अन्य व्यक्ति पर पत्नी के साथ सामूहिक दुष्कर्म से आहत होकर कीटनाशक खाने का बयान दिया था। इस बयान के सामने आते ही तूफान खड़ा हो गया था। पुलिस ने आननफानन केस दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
घटना के बाद तमाम जनप्रतिनिधि, पार्टी नेता, प्रशासनिक अधिकारी सांत्वना देने पहुंचे थे। सबने पीड़ित परिवार की हर संभव मदद का वादा किया था। मगर, वहां से लौटने के बाद मदद की बात भूल गए। हालत यह है कि दोनों बच्चे दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
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26 अक्तूबर को दाखिल हो चुकी है पुलिस की चार्जशीट
रुधौली पुलिस ने घटना के 35 दिन बाद 26 अक्तूबर को ही तफ्तीश पूरी कर चार्जशीट न्यायालय में भेज दिया था। इसमें 29 गवाहों का बयान दर्ज किया गया था। उस समय महिला का बिसरा और वेजाइना स्वाब गोरखपुर लैब में परीक्षण के लिए भेजा गया था। जांच रिपोर्ट लैब से अब तक नहीं मिल पाई है।
बच्चों का आवासीय विद्यालय में होना था दाखिला
मृतक दंपती के नाबालिग दोनों बच्चों का सातवीं और छठवीं कक्षा में प्रवेश होना था। इसके लिए प्रशासन की तरफ से अटल आवासी विद्यालय में दाखिला कराने की पहल की गई थी। मगर, दोनों का भी प्रवेश नहीं हो पाया। दोनों बच्चों काे संरक्षण में लेने वाले मृतक के मंझले भाई ने बताया कि प्रवेश को लेकर प्रयास किया, लेकिन बताया गया कि बच्चों का प्रवेश नए सत्र में हो पाएगा।
बच्चों के गोद लेने की प्रक्रिया भी अधूरी
मृतक के मझले भाई ने बताया कि उनके छोटे भाई व उसकी पत्नी की मौत के बाद दोनों बेटे उसके संरक्षण में हैं। जबकि 18 माह की बेटी को उसकी मौसी ने अपने संरक्षण में लिया है। लेकिन अब तक सीडब्ल्यूसी की तरफ से बच्चों को गोद लेने की कोई प्रक्रिया नहीं कराई गई। प्रत्येक बच्चे के पालन पोषण के लिए मिलने वाली सहायता राशि भी नहीं मिल पा रही है।
इन योजनाओं का मिलना था लाभ
घटना में पुलिस की चार्जशीट दाखिल होने के बाद परिजनों को लक्ष्मीबाई योजना के तहत 10 लाख रुपये तक का मुआवजा, जिला समाज कल्याण की ओर से दोनों बच्चों को ढाई हजार रुपये प्रतिमाह के माध्यम से पेंशन, तात्कालिक लाभ रूप में राष्ट्रीय पारिवारिक योजना के माध्यम से मिलने वाले तीस हजार की राहत राशि मिलनी थी। इसके साथ शासन की संस्तुति के आधार पर मुख्यमंत्री विवेकाधीन सहायता राशि के माध्यम से आर्थिक लाभ मिलना था। पुलिस की चार्जशीट दाखिल होने के डेढ़ महीने बीतने के बावजूद अब तक परिजनों को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
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