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Basti News: रोडवेज बसें बीच रास्ते दे रहीं दगा... फायदा उठा रहे निजी संचालक

Thu, 07 Dec 2023 12:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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सरकारी सिस्टम फेल.... प्राइवेट बस संचालकों की चांदी
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- दस लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुकी हैं डिपो की 70 प्रतिशत बसें, रिपेयरिंग नहीं
- विभिन्न रूटों पर प्रतिदिन एक से दो बसों का हो रहा ब्रेक डाउन, खराब कल पुर्जों को बदलने की व्यवस्था नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। रोडवेज बसों का सफर कर रहे है तो सावधान हो जाएं। यह बीच रास्ते में ही खड़ी हो जा रही है। डिपो से रोज निकलने वाली एक से दो बसों का ब्रेक डाउन हो जा रहा है। सड़क पर चलते समय 70 प्रतिशत बसें हांफने लग रही हैं। इन बसों ने दस लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुकी हैं। अब कंडम होने के कगार पर है। वहीं, परिवहन निगम इन बसों के जरिये आमदनी बढ़ाने का सपना देख रही है। रोडवेज बसों की इन खामियों का सीधा फायदा निजी बस संचालक उठा रहे हैं।
रोडवेज खटारा बसों को बनाकर चला रही है। इसमें भी राज छिपा है। इसका सीधा फायदा निजी बस संचालकों को मिल रहा है। डिपो से निकलने वाली बसें निजी लक्जरी बसों के आगे हर चौराहे पर मात खा रही हैं। रोडवेज बसों के सामने से ही निजी बसें सवारियां भरकर निकल जा रही हैं। सुरक्षा के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी हो रही है। किसी बस की खिड़की टूटी है तो किसी में सीट उजड़ गई है। रास्ते भर रोडवेज बसों के खटर-पटर की आवाज से यात्रियों को परेशानी हो रही है। बीच रास्ते में ब्रेक डाउन होने से दूसरे बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। अधिकारियों व जिम्मेदार कर्मचारियों के इसमें सुधार करने में पूरी तरह से लापरवाही बरत रहे हैं। इसका सीधार असर परिवहन निगम के खजाने पर पड़ रहा है।
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कम होता जा रहा रोडवेज बसों का बेड़ा
डिपो में जिम्मेदारों की बेरुखी के चलते रोडवेज बसों का बेड़ा कम होता जा रहा है। छह माह पूर्व तक 120 बसों की उपलब्धता थी। इसमें 86 सरकारी बस और 34 अनुबंधित बस शामिल रही। मगर 15 वर्ष की अवधि पूरी कर चुकी सात कंडम बसों को बदलने के लिए मुख्यालय भेज दिया गया। इसके बदले अभी तक केवल दो नई बसें आवंटित की गई। डिपो का पांच बसों का और इंतजार है। इस तरह डिपो के पास बसों की संख्या घट गई हैं।
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आधी से अधिक बसें कंडम होने के कगार पर
डिपो की 82 में से 54 बसों ने मानक 10 लाख किमी से अधिक दूरी तय कर ली है। इसमें 31 बसें तो 12 से 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद भी सड़कों पर दौड़ रही हैं। जबकि डिपो की ओर से क्षेत्रीय कार्यालय में इन बसों को नीलाम करने योग्य घोषित करने की रिपोर्ट भी भेज दी गई है। इस संबंध में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कंडम बसों से सवारियां ढोई जा रही है। जबकि इनके संचालन में डीजल भी अधिक खर्च हो रहा है।
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मानक पूरा करने के बाद भी नहीं हुई रिपेयरिंग
सरकारी बसों के दूरी तय करने का मानक दस लाख किलोमीटर है। इसके बाद संबंधित बस की बाडी और इंजन की रिपेयरिंग अनिवार्य होती है। तभी सुरक्षित यात्रा संभव हैं। एक बार पूरी रिपेयरिंग के बाद अधिकतम तीन लाख किलोमीटर तक की क्षमता बढ़ जाती है। मगर यहां बगैर रिपेयरिंग के ही 12 से 15 लाख किलोमीटर तक बसों को दौड़ाया जा रहा है। तभी यह बसें सड़क पर चलते समय ब्रेक डाउन हो जा रही है।
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अस्त-व्यस्त चल रहा कार्यशाला
डिपो की कार्यशाला भी अस्त-व्यस्त है। यहां मरम्मत के नाम पर केवल छिटपुट काम किया जाता है। गाड़ियों की ग्रीसिंग, धुलाई, डीजल भरने तक की सुविधा है। अधिक दूरी तय करने वाली बसों के इंजन एवं बाडी मरम्मत की कोई व्यवस्था नहीं हैं। कार्यशाला में पर्याप्त मैकेनिक भी नहीं हैं।

जानलेवा हो चुकी हैं 21 बसें
डिपो को अपने यात्रियों के जान की भी परवाह नहीं हैं। कागज में खराब हो चुकी अधिकतम दूरी तय करने वाली 21 बसों को प्रतिदिन सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। जुगाड़ से चलाई जा रही यह कंडम बसें कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। बावजूद इसके सरकारी सिस्टम इन बसों का संचालन ठप नहीं कर रहा है।

रोडवेज से आगे बढ़ते ही सवारी भरने में हो रही फेल
डिपो बहुतायत खटारा बसें बस्ती- बांसी, गोरखपुर, अयोेध्या, डुमरियागंज, बढ़नी और लखनऊ रूट पर दौड़ाई जा रही है। इस बसों में डिपो परिसर एवं बाहर ही सवारियां मिलती है। यहां से आगे बढ़ने पर निजी बसों एवं टैक्सी वाहनों से प्रतिस्पर्धा शुरू हो जाती है। ऐसे में जर्जर हो चुकी सरकारी बसों में यात्री नहीं बैठते। गिने चुने यात्रियों को लेकर ही इन बसों को दौड़ना पड़ रहा है।
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विभागीय कर्मचारी पहुंचा रहे निजी बस संचालकों को लाभ
विभागीय कर्मचारी निजी बस संचालकों को लाभ दिलाने में मदद कर रहे हैं। बस संचालकों की सेटिंग रूट तय करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों से है। कागज में जिन बसों को आगरा एक्सप्रेस-वे से दिल्ली तक संचालित दिखाया जा रहा है। उनको दूसरे रूट पर भेज दिया जाता है। करीब आधा दर्जन बसें एक्सप्रेस- वे के बजाय वाया बरेली, मुरादाबाद होकर दिल्ली तक चलाया जा रहा है। इस बात की पुष्टि यात्री परवेज कुमार, रमजान, दिवाकर ने की है। जिम्मेदारों को इस बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद भी तय रूट पर बसें नहीं संचालित की जा रही है। लंबी की निजी बसों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
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कुछ खराब बसों का विवरण एक नजर में
बस संख्या तय करने वाली दूरी(किमी) स्थिति
यूपी 14 सीटी/0277 1432288 खराब
यूपी 53 सीटी/0611 1522020 खराब
यूपी 53 सीटी/0613 1314098 खराब
यूपी 53 सीटी/1300 145361 खराब
यूपी 53 सीटी/1487 1677532 खराब
यूपी 53 सीटी/1597 1744388 खराब
यूपी 53 सीटी/1734 1629029 खराब
यूपी 53 सीटी/1828 1590009 खराब
यूपी 51 टी/7825 1551200 खराब
यूपी 51 टी/7826 1654019 खराब
यूपी 53 सीटी/2120 1188103 खराब

डिपो की 15 वर्ष से अधिक की उम्र पूरी कर चुकी सात बसों को बदलने के लिए मुख्यालय को सुपुर्द कर दिया गया है। दो नई बस आवंटित हो गई है। बाकी पांच बस मिलने वाली है। इसके अलावा रिपेयरिंग के लिए बसों की सूची भेज दी गई है।
आयुष भटनागर, एआरएम रोडवेज।
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