- कमर व हड्डी रोग की बढ़ रही शिकायत
- परेशान हैं शहर में यात्रा करने वाले
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर की करीब आधा दर्जन से अधिक सड़कों की स्थिति दयनीय है। यात्रा में जहां लोग झटका खा रहे हैं वहीं तमाम लोगों का इन गड्ढों में यात्रा से सेहत पर भी प्रभाव है। इसे लेकर नगर पालिका व पीडब्ल्यूडी दोनो चुप्पी साधे हैं।
नगर पालिका क्षेत्र की जर्जर सड़कों पर शासन की मेहरबानी का फिर से इंतजार होने लगा है। क्योंकि शहरी क्षेत्र की पांच सड़कों का सर्वे पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड ने किया है। इसके निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव व सर्वे रिपोर्ट भेजी गई है। शहर की इन सड़कों की सर्वे में कुल लंबाई 12.350 किमी तय हुई है। इस पर करीब 13.90 करोड़ रुपये खर्च होगा।
करीब छह माह पहले नगर पालिका की जर्जर हो चुकी सड़कों के ठीक कराने का निर्देश तत्कालीन डीएम प्रियंका निरंजन ने दिया।
ये हैं वह सड़कें जिसे होना है हस्तांतरित
-आचार्य रामचंद्र शुक्ल तिराहा से डीएम आवास से भुअर जेल रोड होते हुए कंपनी बाग चौराहे तक 2
- बस्ती कांटे मार्ग के रोडवेज तिराहे से दक्षिण दरवाजा होते हुए रेलवे स्टेशन से शुगर मिल मार्ग तक
-बड़े वन कंपनी बाग मार्ग से सुभाष चौक से बस्ती कांटे मार्ग नेहरू तिराहे तक मालवीय रोड
- बस्ती कांटे मार्ग अस्पताल चौराहा से दक्षिण दरवाजा, मंगल बाजार ,करुआ बाबा तिराहा पांडेय बाजार चौराहा होते हुए बांसी मार्ग पर नगर पालिका सीमा तक
- पुलिस लाइन से डाकबंगला होते हुए कबीर तिराहा तक
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बोले नागरिक
शहर में आने के लिए पसीना छूट जाता है। क्योंकि सड़कों पर गड्ढे हो गए हैं। इन गड्ढों में गिर कर पिछले दिनों पैर में चोट लग गई थी। वह तो संयोग अच्छा था केवल घुटना माइनर क्रेक हो गया था। कई दिनो तक परेशान होना पड़ा।
राजकुमार प्लास्टिक कांप्लेक्स
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शहर की स्थिति बेहद दयनीय है। इस पर यात्रा आसान नहीं है। शहर में आते जाते कमर में दिक्कत आ गई। बाइक चलाने के दौरान शहर के सभी रास्तों पर इतने झटके लगते हैं कि हड्डियों में दर्द हाेने लगता है।
राजीव चौधरी
जिगिना
बोलीं पालिकाध्यक्ष
शहर के सभी सड़कों को दुरुस्त करने की पहल के तहत पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित किया गया है। जो रास्ते हस्तांतरित नहीं हैं उनको दुरुस्त कराया जा रहा है।
नेहा वर्मा, पालिकाध्यक्ष
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शासन को सड़क निर्माण का सर्वे कराकर आगणन भेजा गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी तत्काल इस पर नियमानुसार कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
-अवधेश कुमार, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड