पुरानी बस्ती। 10 वर्ष बाद फरवरी में पड़े रमजान के दौरान बाजार किस्म-किस्म के फलों से भरे हैं। गर्मी के मुकाबले अधिक वेरायटी के फल बाजार में जरूर उपलब्ध हैं, मगर महंगाई नेे रमजान में इफ्तार का स्वाद फीका कर दिया है। रोजेदारों पर फलों की महंगाई भारी पड़ रही है और दस्तरखान पर फल सीमित दिख रहे हैं।
दक्षिण दरवाजा के पास फल दुकान लगाने वाले मुख्तार रागनी ने बताया कि फलों की डिमांड बढ़ गई है। रमजान शुरू होने के कारण मांग में बेतहाशा वृद्धि से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। अधिक बिक्री पपीता, केला, सेब, अनार व संतरे की हो रही है। पानी वाला नारियल 70 से सौ रुपये नग बिक रहा। रेट अभी और बढ़ेंगे। स्टेशन रोड के फल कारोबारी हारुन ने बताया कि हरा अंगूर 50 रुपये पाव है। काला अंगूर 70 रुपये पाव तो ड्रैगन फ्रूट सौ रुपये पीस है। केला 60 रुपये दर्जन, सेब 160 रुपये किलो बिक रहा है।
संतरे के तीन रेट 60, 80 व 100 रुपये किलो है। अनार 160 रुपये किलो, बट्टी 60 रुपये किलो बिक रहा। सर्वाधिक बढ़ोतरी इलाहाबादी अमरूद में हुई है, यह 100 रुपये से बढ़कर सीधे 150 रुपये किलो हो चुका है। डिमांड पूरे महीने फलों की बनी रहेगी। पुरानी बस्ती क्षेत्र के पांडेय बाजार, दक्षिण दरवाजा के जावेद अख्तर, अहद, हलीम, मुश्ताक ने बताया रोजा रखने वाले पूरे दिन भूखे प्यासे रहते।
शाम की रोजा खोलने में फल अधिक प्रयोग करते जिससे प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे। लग्न व रोजा दोनों एक साथ पड़ने से खरीद मात्रा घटानी पड़ रही। पहले जो फल एक किलो खरीदते थे, अब आधा किलो खरीद रहे।