वन, पीडब्ल्यूडी, जलनिगम, राजस्व आदि विभागों को भौतिक सत्यापन के साथ करना है मूल्यांकन
निविदा प्रक्रिया में अभी होगी और देरी, धीमी गति से लग सकता है विकास कार्य को झटका
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर के बाहर चारों तरफ प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना शुरू होने में अभी देरी है। जमीन अधिग्रहण के दांव-पेच में यह उलझती जा रही है। एनएचएआई ने तीन महीने पहले जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर किनारा कस लिया है। अधिग्रहण क्षेत्र में पड़ने वाली जमीन, जंगल, मकान, बोरिंग आदि संपत्तियों के मूल्यांकन का कार्य भी बाकी है। इससे अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी नहीं हो पा रही है। धीमी गति से बढ़ाई जा रही प्रक्रिया के चलते इस परियोजना को झटका भी लग सकता है।
रिंग रोड परियोजना के लिए 10 अक्तूबर तक निविदा प्रक्रिया पूरी करने की घोषणा हुई थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा में यह साकार होते नहीं दिख रहा है। वजह यह कि प्रत्येक चरण की प्रक्रिया काफी विलंब से पूरी की जा रही है। एनएचएआई को सिर्फ जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी करने में तीन माह से अधिक का समय लग गया। इसके बाद अधिग्रहण क्षेत्र की संपत्तियों का मूल्यांकन कार्य होता है। इसके अनुसार काश्तकारों को भुगतान कर जमीन अधिग्रहित कर ली जाती है।
दूसरे चरण का मूल्यांकन कार्य अधर में लटक गया है। विशेष भूमि आधिपत्य विभाग की ओर से अधिग्रहण क्षेत्र में पड़ने वाली वन विभाग, पीडब्ल्यूडी, जलनिगम, विद्युत आदि विभागों से संबंधित संपत्तियों के मूल्यांकन की रिपोर्ट मांगी गई है। थ्री-डी यानी जमीन चिह्नांकन की कार्रवाई के तीन महीने बाद भी इन विभागों से मूल्यांकन की रिपोर्ट के साथ एनओसी नहीं दी गई है। कार्यदायी संस्था एनएचएआई ने इसके लिए प्रयास करना बंद कर दिया है। यहां नियुक्त किए गए एनएचएआई के जिम्मेदार इस कार्य का ठीकरा प्रशासन पर थोप रहे हैं।
विशेष भूमि आधिपत्य विभाग का यह तर्क है कि सभी प्रकार की संपत्तियों के मूल्यांकन होने के बाद ही अधिग्रहण के लिए धन की मांग की जा सकती है। इसके बाद जमीन का अधिग्रहण कराया जा सके। बहरहाल इस मकड़जाल में पूरी परियोजना उलझी हुई है।
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1138.72 करोड़ की लागत से बगगी फोरलेन रिंगरोड
रिंग रोड शहर से दस किमी दूर गोटवा बाजार से शुरू होकर हड़िया चौराहे होते हुए फिर उसी स्थान पर ले जाकर समाप्त की जाएगी। इसकी कुल लंबाई 22.15 किमी है। 40 से 60 मीटर चौड़ी फोरलेन और उसके किनारे के कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए 1138.72 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अभी यहां से डिमांड न भेजे जाने के कारण एनएचएआई मुख्यालय से फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है।
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35 गांवों के 500 किसानों से ली जाएगी जमीन
रिंग रोड परियोजना के लिए तैयार खाका के अनुसार बस्ती सदर तहसील के 35 गांवों से होकर यह सड़क गुजरनी है। इसमें सदर तहसील के ग्राम पंचायत बकैनियाद्वीप, बक्सर, बल्लीपट्टी, बनकटा, बरवनियां, बायपोखर, बेलवाडाड़, भदेश्वरनाथ, भटहा, देवराव खास, देवरिया, डीघा, गोटवा, कड़रखास, कटया, खुटहन, कोपवा, कोपिया, मछिया, निविया, नौगढ़, ओठगनपुर कला, पचौरा, परसाजाफर, परसा डफाली, परसादपुर, पिपरा मेघउ, पोखरभिटवा, पुरैना, राजा चक, राजाजोत, रिठौली, सबदेइया कला, समसपुर व सेखुई ग्राम पंचायत शामिल हैं। यहां के 500 किसानों की कुल 90.8488 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है।
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दो राष्ट्रीय राजमार्ग पर होगी क्राॅसिंग
यह रिंग रोड गोरखपुर-लखनऊ फोरलेन और लुंबिनी-दुद्धी मार्ग को दो जगहों पर क्राॅस करेगा। इसके अलावा बस्ती-डुमरियागंज मार्ग से भी रिंग रोड का जुड़ाव होगा। रिंग रोड के चलते कुआनो नदी पर ब्रिज का निर्माण भी कराया जाएगा। इस रिंग रोड के जरिए किसी भी मार्ग की यात्रा सुलभ होगी।
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आठ साल पहले हुई थी घोषणा
सांसद हरीश द्विवेदी की पहल पर वर्ष 2015 में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कलवारी में जनसभा के दौरान शहर के चारों तरफ रिंग रोड बनाने की घोषणा की थी। इस प्रस्ताव को वर्ष 2023 में स्वीकृति मिली। इसके बाद सांसद ने जनपद वासियों से वादा किया कि इसी साल 10 अक्तूबर तक निविदा प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू हो जाएगा।
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कोट
रिंग रोड के लिए अधिग्रहण क्षेत्र में पड़ने वाली जमीनों एवं संपत्तियों का अलग-अलग विभागों से मूल्यांकन कराया जा रहा है। करीब एक महीने में यह कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद देर नहीं लगेगी।
-विनोद कुमार पांडेय, एसडीएम सदर
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अभी नहीं मिली है सड़क की डिजाइन
रिंग रोड परियोजना के लिए जिले स्तर पर नियुक्त किए गए एनएचएआई के इंजीनियर रोहित कुमार ने कहा कि उन्हें अभी सड़क की डिजाइन नहीं मिली है। वैसे 40 से 60 मीटर चौड़ी फोरलेन सड़क बननी है। कुआनो नदी पर एक ब्रिज भी बनेगा। जहां तक जमीनों के अधिग्रहण की बात है तो यह जिम्मेदारी जिला प्रशासन और एसएलओ कार्यालय की है। मूल्यांकन वहीं से किया जाना है।