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Basti News: लेखपालों की हड़ताल से राजस्व कामकाज ठप, आमजन की बढ़ी परेशानी

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हर्रैया तहसील में धरना देते लेखपाल संवाद
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बस्ती। लेखपालों के आंदोलन का असर अब राजस्व विभाग के कामकाज पर साफ दिखाई देने लगा है। अतिरिक्त हल्कों का कार्य छोड़कर बस्ता जमा करने के बाद लेखपाल कार्य बहिष्कार पर चले गए हैं। इससे सीमांकन, खसरा, वरासत, आय-जाति-निवास प्रमाणपत्रों के सत्यापन समेत राजस्व संबंधी अन्य कार्य प्रभावित हुए हैं। जनसुनवाई में आने वाली शिकायतों के निस्तारण पर भी इसका असर पड़ रहा है।
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जनपद में बड़ी संख्या में लेखपालों को अतिरिक्त हल्कों की जिम्मेदारी दी गई थी। करीब 550 गांव ऐसे हैं, जहां लेखपाल अतिरिक्त हल्के के रूप में कार्य देख रहे थे। आंदोलन के तहत इन हल्कों का बस्ता जमा कर दिए जाने से इन गांवों में राजस्व संबंधी कामकाज प्रभावित हुआ है। जमीन के सीमांकन और खसरा तैयार कराने जैसे जरूरी कार्यों के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है।
सदर तहसील में अतिरिक्त हल्के का बहिष्कार जारी रहा। भानपुर और रुधौली तहसील में भी लेखपालों ने अतिरिक्त हल्के का कार्य नहीं किया। इससे राजस्व संबंधी काम कराने तहसील पहुंच रहे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कई लोगों को बिना काम कराए लौटना पड़ा।
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जनसुनवाई की शिकायतों की जांच रिपोर्ट भी अटकी
लेखपालों के स्तर से होने वाली जांच और रिपोर्ट से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण पर भी असर पड़ा है। ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायतों में समय से जांच रिपोर्ट नहीं लग पाने के कारण उनके निस्तारण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ रही है।

एसडीएम की कार्यशैली को लेकर भी लेखपालों में नाराजगी
हर्रैया तहसील में लेखपालों में एसडीएम की कार्यशैली को लेकर भी नाराजगी है। तहसील परिसर में धरना जारी है। लेखपालों का कहना है कि समस्याओं का समाधान होने तक अतिरिक्त हल्कों का काम नहीं किया जाएगा। संघ का आरोप है कि तहसील प्रशासन लेखपालों का मनमाना स्थानांतरण कर रहा है। बकाया वेतन और एरियर का भुगतान लंबित है। तहसील अध्यक्ष के स्थानांतरण के संबंध में जिला स्तर पर अनैतिक और गलत रिपोर्ट भेजे जाने का भी आरोप लगाया गया है। 24 सितंबर को तहसील अध्यक्ष कृष्ण मोहन पटेल और तहसील मंत्री दुर्गेश कुमार द्विवेदी की अगुवाई में हुई आपात बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि उपजिलाधिकारी के स्थानांतरण तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। संघ पदाधिकारियों ने बैठकों के दौरान लेखपालों से जातिगत प्रश्न पूछने और व्यक्तिगत रूप से प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया है वहीं, एसडीएम उमाकांत तिवारी ने आरोपों को तथ्यहीन बताया। उनका कहना है कि स्थानांतरण शासकीय सेवा की सामान्य प्रक्रिया है। इस पर अनुचित दबाव बनाने के लिए विरोध किया जा रहा है।
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इन कामों पर पड़ा असर
जमीन के सीमांकन के आवेदन और कार्य प्रभावित।
खसरा तैयार कराने और उपलब्ध कराने में परेशानी।
वरासत से जुड़े मामलों का निस्तारण प्रभावित।
आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों के सत्यापन में देरी।
ऑनलाइन और ऑफलाइन शिकायतों की जांच रिपोर्ट अटकी।
जनसुनवाई और आईजीआरएस से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण पर असर।

बोले लेखपाल
सरकार की नजर में लेखपाल सामान्य कर्मी हैं, जबकि उनसे अतिरिक्त हल्के के साथ कार्यालय में अटैच कर तकनीकी काम भी लिया जा रहा है। यदि तकनीकी काम कराना है तो पद को तकनीकी किया जाए और वेतनमान बढ़ाया जाए।
-महेंद्र यादव, अध्यक्ष, सदर तहसील

काम के बोझ तले लेखपाल दब गए हैं। सामान्य कार्य के अलावा सर्वे से लेकर जुलूस तक में ड्यूटी लगाई जाती है। इससे तैनाती वाले हल्के का काम प्रभावित होता है। इसके अलावा डिजिटल कार्य भी सौंप दिया गया है।
-देवेंद्र कुमार, मंत्री, सदर तहसील
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बोले नागरिक
लेखपालों के धरना-प्रदर्शन के कारण सीमांकन का काम नहीं हो रहा है। पुलिस थाने, एसडीएम कोर्ट और लेखपाल के यहां चक्कर लगाने के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है। आवेदन भी नहीं लिए जा रहे हैं।
-मनोज विश्वकर्मा, बरसांव, हर्रैया

ऑनलाइन और ऑफलाइन सेवाओं से जुड़े काम प्रभावित हैं। खसरा नहीं मिल पा रहा है और सीमांकन के लिए अर्जी नहीं ली जा रही है। आईजीआरएस से जुड़े काम भी प्रभावित हैं।
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-महेश कुमार पांडेय, केशवपुर, हर्रैया
कोट
कोट
आंदोलनरत लेखपालों से हर स्तर पर वार्ता करते हुए समस्याओं के निस्तारण का प्रयास कराया जा रहा है।
-कृत्तिका ज्योत्स्ना, डीएम, बस्ती।
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