दो दशक से जिला अस्पताल को ह्रदय रोग विशेषज्ञ का इंतजार
कैली के संविदा डॉक्टर ने भी छाेड दी नौकरी, काम चलाऊ इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। हृदय रोग के मरीजों की सरकारी अस्पतालों में मुकम्मल इलाज की व्यवस्था नहीं है। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा इकाई ओपेक चिकित्सालय कैली हो या जिला अस्पताल यहां कार्डियोलॉजिस्ट नहीं हैं। लिहाजा, ऐसे मरीजों की फिजिशियन ही प्राथमिक उपचार कर हॉयर सेंटर रेफर कर देते हैं। दो दशक से 300 शैय्या वाला जिला अस्पताल कार्डियोलॉजिस्ट की राह देख रहा है।
बहुत पहले कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में तैनात डॉ. बीपी सिंह का स्थानांतरण हो गया। तब से हृदय रोग विभाग में ताला लगा है। ऐसे में यहां जो भी मरीज आते हैं, उनका फिजिशियन प्राथमिक उपचार के बाद गोरखपुर या लखनऊ रेफर कर देते हैं। यही हाल मेडिकल कॉलेज का भी है। 500 शैय्या वाले ओपेक कैली चिकित्सालय में एक साल पहले डॉ. पंकज सिंह की तैनाती हुई थी, लेकिन कुछ दिन सेवा के बाद यहां से चले गए। तब से विभाग में ताला लटक रहा है। अब हृदय रोग विभाग में दूसरे चिकित्सक मरीजों का इलाज करते हैं।
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार कौशल कहते हैं कि हृदय रोग विभाग में डॉक्टर की तैनाती नहीं है। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि हृदय रोग विभाग में संसाधनों को सुरक्षित रखा गया है। जरूरत पड़ने पर फिजिशियन ही हृदय रोगियों का इलाज कर लेते हैं।
...
हृदयाघात के लक्षण
सीने में दर्द, अचानक पसीना आना, कंधे में दर्द भी हृदय रोग का लक्षण होता है। शुगर मरीजों में अधिकांश के हृदयाघात में दर्द नहीं होता। केवल उन्हें अचानक पसीना आने लगता है। घबराहट व बेचैनी के अलावा कभी-कभार उल्टी होने लगती है।
...
10 से 15 मरीज दिल की बीमारी लेकर पहुंच रहे अस्पताल
जिला अस्पताल व कैली में 10 से 15 मरीज दिल की बीमारी लेकर रोजाना पहुंचते हैं। इसमें कम उम्र से लेकर जवान व बुजुर्ग शामिल हैं। फिजिशियन अंकित चतुर्वेदी व कैली के मेडिसिन विभाग के डाॅ. रजत पांडेय के अनुसार हृदय रोगों के जोखिम से बचने के लिए सावधानी बरतें। हृदय रोगों में स्ट्रोक, जन्मजात हृदय दोष, हृदयाघात, कार्डियक अरेस्ट, पेरिकार्डियल बहाव, रुमेटिक हृदय रोग, कोरोनरी धमनी रोग, एनजाइना आदि बीमारियों से दूर रहने के लिए स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं।