बस्ती। धनतेरस से शुरू हुई लक्ष्मी पूजा का समापन प्रतिमा विसर्जन के साथ हुआ। देर रात तक भक्तों ने गाजे-बाजे के साथ जुलूस निकालकर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर भगवान की प्रतिमा का विसर्जन किया। कुआनो के अमहट घाट और मुक्तिघाट समेत ग्रामीण क्षेत्रों में घाटों पर आधी रात के बाद तक विसर्जन किया गया। जिले में स्थापित 1353 में से अधिकांश प्रतिमाएं विसर्जित की गईं। शेष बची प्रतिमाओं का बृहस्पतिवार व शुक्रवार को किए जाने का कार्यक्रम तय है। विसर्जन के दौरान सुरक्षा में तैनात जवान मुस्तैद दिखे। बस्ती शहर के दक्षिण दरवाजा से लेकर अमहट घाट तक मेले जैसा दृश्य रहा। ग्रामीणों इलाकों में भी मां लक्ष्मी को विधि-विधान से विदाई दी। शहर सहित ग्रामीण इलाकों में स्थापित किए गए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश सहित मां सरस्वती की पूजा विधि विधान से की गई। धनतेरस से शुरू हुई लक्ष्मी पूजा के बाद बुधवार सुबह से प्रतिमा पंडालों में हवन शुरू हुआ। शाम को ट्रैक्टर ट्राली और अन्य वाहनों पर रख कर प्रतिमाओं को फूलमालाओं से सजाया गया। इसके बाद प्रतिमाओं को शहर के विभिन्न हिस्सों से होते हुए अमहट घाट की ओर ले जाया गया। डीजे की धुन पर थिरकते युवाओं ने जमकर गुलाल और अबीर उड़ाए। भक्ति गीतों से देर रात तक पूरा माहौल सराबोर रहा। हर कोई देवी गीतों पर थिरकता नजर आया। विसर्जन के दौरान पुलिस चौकस रही। पुरानी बस्ती से लेकर अमहट घाट तक पुलिस के जवान मुस्तैद रहे।
ग्रामीण क्षेत्र में भी धूमधाम से हुआ विसर्जन
- शहर से सटे गनेशपुर कस्बे और उससे सटे गांवों की लक्ष्मी प्रतिमाओं का विसर्जन मुक्ति घाट पर किया गया। बनकटी क्षेत्र के देईसाड़, बानपुर, सिरसिया, ककरहा आदि स्थानों की मूर्तियों का विसर्जन कुआनो नदी के पिड़िया घाट पर हुआ। जबकि बनकटी चित्राखोर, बरुआर, मथौली और रौतापार की प्रतिमाओं का विसर्जन लालगंज के मनोरमा नदी में किया गया। बनकटी प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र के देईसाड़, पूजनगंज , पसड़ा , विरतिया, बनकटी सहित विभिन्न स्थानों पर स्थापित लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन बुधवार को किया गया। डीजे की धुन पर अबीर गुलाल उड़ाते भक्त भाव से सराबोर नजर आए। जय घोष के बीच कुआनों नदी बानपुर व लालगंज के मनोरमा नदी में विसर्जन किया गया। नगर बाजार प्रतिनिधि ने नगर बाजार, गोटवा बाजार, एकसड़ा आदि क्षेत्र की प्रतिमाओं और वाल्टरगंज प्रतिनिधि ने अपने क्षेत्र की कई प्रतिमाओं के विसर्जन की खबर दी है। इसके अलावा हर्रैया, विक्रमजोत, छावनी, परशुरामपुर, कुदरहा, मुंडेरवा, भानपुर, बभनान, रुधौली आदि क्षेत्र में भी प्रतिमा विसर्जन किया गया।कप्तानगंज और महराजगंज की मूर्तियों का विर्सजन पंडूल घाट में किया गया। ग्रामीण स्तर पर भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रहे।
अमहट घाट पर रहा पुख्ता इंतजाम
- शहर की प्रतिमाओं के विसर्जन स्थल अमहट घाट पर प्रशासन की ओर से चाक चौबंद व्यवस्था की गई थी। नगर पालिका की ओर से साफ सफाई, चूनाकारी के साथ बिजली की बेहतरीन व्यवस्था की गई थी। पुलिस प्रशासन की ओर से मोटर बोट के साथ ही बड़ी संख्या में घाट पर पुलिस के जवान लगाए गए थे। इसके अलावा धोबीघाट के पास अधिकारियों और कर्मचारियों का एक कैंप भी बनाया गया था। अधिकारियों ने घाट का जायजा लेकर कर्मचारियों को दिशा निर्देश दिए। घाटके किनारे पर बालू भरी बोरियां भी रखी र्गइं, जिससे प्रतिमा को नाव तक ले जाने में पैर न फिसले।
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तीन दिन होगा लक्ष्मी प्रतिमा विसर्जन
- जिले में स्थापित लक्ष्मी प्रतिमाओं का तीन दिन तक विसर्जन का क्रम चलेगा। कलवारी थाना क्षेत्र में स्थापित 56 लक्ष्मी प्रतिमाए चकदहा, कलवारी, लौवाड़ा, कुसौरा, बघौड़ा, अगौना, सैफाबाद, चमनगंज, बेनीपुर, बैड़ारी, गंगापुर, गायघाट, बबुरहिया सहित विभिन्न गांवों में स्थापित हुई हैं। जिनका विसर्जन टांडा मार्ग पर कठौवा पुल, डारीडिहा, एकसड़ा सहित घाटों पर होगा।
जाम में फंसकर लोग खूब हुए हलकान
- विसर्जन जुलूस के दौरान वाहनों का मार्ग परिवर्तन करने से लोगों को काफी परेशानी हुई। जुलूस के रास्ते में किसी भी वाहन को आने-जाने से रोक दिया गया था। पुलिस को चकमा देकर जो भी वाहन लेकर अंदर चला गया, उसकी गाड़ी घंटों जाम में फंसी रही। खासकर रोडवेज के नेहरू तिराहा और कंपनीबाग व फव्वारा तिराहे से गांधीनगर की ओर और दक्षिण दरवाजा से करुआ बाबा स्थान तिराहे की ओर आवागमन बंद कर दिया गया था। इसलिए मालवीय रोड पर भी कई बार जाम लगा। लोगों ने गलियों का रास्ता पकड़ा तो गलियां भी जाम हो गईं। गनीमत रही कि जिस समय प्रतिमाओं के निकलने का क्रम शुरू हुआ तब तक काफी हद तक लोकल ट्रैफिक का दबाव कम हो चुका था।
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