तीन अशरों में बांटा गया रमजान
संवाद न्यूज एजेंसी
नगर बाजार (बस्ती)। मुकद्दस माह-ए-रमजान में रोजा रखने का सिलसिला जारी है। महीने में पहले दस रोजे तक पहला अशरा का होता है। पहले अशरे को रहमतों और अजमतों का अशरा कहा जाता है। इस अशरे में अल्लाह की रहमत बरसती है, जिसके चलते रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से रहमतों और अजमतों की दुआएं करते हैं। अल्लाह की रहमत से मालामाल होते हैं।
नगर बाजार जामा मस्जिद मस्जिद के पेश इमाम कारी नसीरुद्दीन ने बताया कि रमजान के महीने में हर मोमिन ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में गुजारते हैं। रमजानुल मुबारक का हर लम्हा अजमतों वाला होता है। इबादतों के महीना रमजानुल मुबारक को को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का होता है। रमजान का चांद नजर आते ही शैतान को कैद कर लिया जाता है। वहीं जहन्नम के दरवाजों को बंद कर जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। इस पाक महीने में सवाब का दर्जा सत्तर गुना बढ़ जाता है। इन दस दिनों में अल्लाह पाक की रहमतें और बरकतें नाजिल होती हैं। रोजेदार भी रोजे रखकर अल्लाह से बख्शीश की दुआएं करते हैं। आमाल में नेकियों का इजाफा करता है।