फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Basti News: राम जानकी मार्ग... इसी राह जनकपुर से लौटी थी राम की बरात

Fri, 19 Jan 2024 02:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती में छावनी से शुरू हुई है यह सड़क, 55 किमी तक टू-लेन में बदली गई
विज्ञापन

राम-सीता की डोली अयोध्या तक पहुंचने के बाद नाम पड़ा रामजानकी मार्ग
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती की झोली में प्रभु श्रीराम से जुड़ी स्मृतियों की भरमार है। जिले का रामजानकी मार्ग भी प्रभु श्रीराम के पद चिह्नों का अविस्मरणीय उदाहरण है। मान्यता है कि त्रेताकाल में जनकपुर में व्याह रचाने के बाद भगवान श्रीराम की बरात इसी रास्ते अयोध्या लौटी थी। तभी से इस राह को रामजानकी मार्ग के नाम से जाना जाता है। सरयू किनारे स्थित इस राह का वर्तमान में आधुनिकीकरण कर दिया गया है। जिले में 55 किमी लंबी यह सड़क टू-लेन विद पेप्ड सोल्डर के रूप में तैयार कर दी गई है।
अयोध्या- गोरखपुर फोरलेन पर जिले के छावनी कस्बे से रामजानकी मार्ग की शुरूआत होती है। यह गोरखपुर, देवरिया से बिहार होते हुए जनकपुर तक जाती है। इसकी कुल लंबाई 391 किमी है। इस सड़क को कई प्रखंडों में बांटकर फोरलेन और टू- लेन में तब्दील किया गया जा रहा है। बस्ती में रामपुर से छावनी तक 55 किमी लंबाई में यह सड़क टू-लेन में तब्दील कर दी गई है। छावनी में फ्लाई ओवर निर्माणाधीन है। इसके अलावा टोल प्लाजा भी बनाया जाना शेष है। इस सड़क के पुनर्निर्माण से अयोध्या से जनकपुर तक का सफर आसान हो गया है। पर्यटक इसी रास्ते भगवान राम के जन्म स्थली से लेकर माता सीता के घर मिथिला नगरी तक की यात्रा करते हैं।
विज्ञापन

...
बरात के साथ डोली में आए थे राम और सीता
मान्यता है कि जनकपुर में वैवाहिक कार्यक्रम पूरा होने के बाद बरात के साथ राम और सीता की डोली इसी रास्ते अयोध्या लौटी थी। रास्ते में जगह- जगह ऋषि, मुनि, तपस्वी एवं प्रजा ने उनका स्वागत किया था। यह रास्ता सरयू नदी के तटीय क्षेत्रों से होकर गुजरा है। रास्ते में कई जगहों पर प्रभु राम की स्मृतियों से जुड़े स्थल मंदिर का रूप ले लिए हैं। कुदरहा के निकट मोक्षेश्वर धाम, दुबौलिया क्षेत्र स्थित हनुमान बाग, छावनी में स्थित रामरेखा नदी आज भी राम के पदचिह्नों की निशानी मानी जाती है।
विज्ञापन

...
मनवर- सरयू के बीच नहीं होती चने की खेती
जिले के हर्रैया तहसील क्षेत्र में रामजानकी मार्ग के उत्तर मनवर नदी है और दक्षिण सरयू स्थित है। किंवदंति है कि अयोध्या लौटते समय दोनों नदी के बीच में माता सीता के पैर चने की खूंटी चुभ गई थी। मान्यता है कि सीता ने शाप दे दिया था। तभी से इस अंचल के चार सौ गांवों में चने की खेती नहीं की जाती है। यह परंपरा आज भी चली आ रही है।

18जेएनडी32-सहसचिव राधेश्याम शर्मा। स्वयं

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें