संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मोंथा चक्रवात के चलते दो दिन से मौसम खराब है। बृहस्पतिवार को दिन भर मध्यम बारिश से तापमान में गिरावट आ गई है। बारिश के बीच हवा चलने से धान और गन्ने की फसल लेट गई है। इससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका सता रही है। तापमान में गिरावट से हल्के कपड़े में लोगों को ठंड का अहसास होने लगा है। घरों में एसी, पंखे बंद करने पड़े। लोगों को चद्दर ओढ़कर सोना पड़ा रहा है।
इस बार जिले में एक लाख 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती हुई थी। फसल बिल्कुल तैयार होने लगी थी। अगेती फसलों की कटाई-मड़ाई भी शुरू हो गई थी। कृषि विभाग का अनुमान है कि 25 से 30 प्रतिशत धान की फसल कट चुकी है। लेकिन, अभी अधिकांश हिस्से की फसल खेत में सूखने के इंतजार में थी। किसानों का कहना है कि एक सप्ताह में खेत कटकर खाली हो जाता। इसी बीच मोंथा चक्रवात ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है।
दो दिनों की मध्यम बारिश से लगभग सूखकर तैयार हो चुकी धान की फसल अंतिम चरण में भीगकर खेत में लेट गई है। धान की बालियों में फिर से नमी आ गई है। रमवापुर के किसान लक्ष्मी प्रसाद पांडेय बताते हैं कि दो दिन पहले धान की फसल में थोडी बहुत नमी बची थी। जिसके सूखने का इंतजार किया जा रहा था। इसी बीच बारिश होने लगी। अब 80 प्रतिशत पकी हुई फसल खेत में लेट गई है। इससे उसमें नमी और बढ़ गई है। मौसम यदि सही नहीं हुआ और अच्छे से धूप नहीं खिली तो धान की बालियां काली पड़ जाएगी।
इसमें चावल के दाने भी कुपोषण के शिकार हो जाएंगे। यहीं हाल रहा तो हम अपने धान की फसल को समर्थन मूल्य पर भी नहीं बेच पाएंगे।
जहां-तहां खड़ी हो गई कंबाइन मशीन : खेतों में धान की कटाई कर रही कंबाइन मशीन दो दिनों से बारिश होने की वजह से जहां-तहां खड़ी हो गई हैं। पंजाब से कंबाइन लेकर आए गुरुविंदर बताते हैं कि कम से कम सप्ताह भर का समय बर्बाद हो गया है। बारिश बंद होने के एक सप्ताह तक फसलों के सूखने का इंतजार करना पड़ेगा। इसके बाद ही कटाई शुरू की जा सकती है।
बेमौसम बारिश से गिरी धान की फसल- संवाद