बस्ती। रुधौली क्षेत्र के मुनियांव गांव में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन बुधवार को श्रीकृष्ण की रासलीला का अद्भुत वर्णन हुआ। व्यास पीठ से अयोध्या से पधारे युवराज मदनमोहनाचार्य मोहित ने प्रभु की लीला का मंचन किया। गोपी और श्रीकृष्ण के प्रेम का प्रसंग सुनकर श्रोता भी भाव विभोर उठे।
कथा के दौरान आचार्य मोहित के गुरुदेव अयोध्या एवं हरिद्वारद्वय के पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री श्यामनारायणाचार्य जी महाराज का आगमन हुआ। उनके स्वागत में कथा स्थल की अलौकिक सजावट की गई थी। गुरुदेव के आगमन के दौरान फूलों की वर्षा हुई।
इस दौरान श्यामनारायणाचार्य ने शिष्यों एवं भक्तों को आशीर्वाद देते हुए श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सत्संग से मानव जीवन जीने की कला सीखने को मिलती है। प्रभु की भक्ति में सभी तरह के कष्ट का निवारण होता है। आचार्य मोहित ने कहा कि प्रभु प्रेम के भूखे हैं। सच्ची भक्ति और साधना से उन्हें कहीं भी प्रकट किया जा सकता है।