बस्ती। पांडेय बाजार रेलवे क्रॉसिंग पर प्रस्तावित ओवरब्रिज का प्रस्ताव आखिरकार निरस्त हो गया। अब यह ओवरब्रिज रेलवे स्टेशन के पूर्वी केबिन चीनी मिल क्रॉसिंग पर बनाया जाएगा, जिससे समस्या जस की तस बनी रहेगी। शहर के आधे हिस्से की आबादी और थोक मंडी का भार ढोने वाला पांडेय बाजार का मुख्य मार्ग जाम की समस्या से फिलहाल मुक्त नहीं हो पाएगा। यहां ट्रेनों के गुजरने के दौरान हर घंटे क्रॉसिंग के दोनों तरफ आधे शहर के लोगों का आवागमन ठप हो जा रहा है।
शहर की पहचान पुरानी बस्ती और गांधीनगर समेत दो हिस्सों में होती चली आ रही है। गांधीनगर की अपेक्षा पुरानी बस्ती क्षेत्र काफी सघन रचा बसा है। यहां रेलवे स्टेशन के अलावा अनाज, खाद, सीमेंट आदि की थोक मंडी और कई मालगोदाम भी हैं। डेढ़ दशक पहले तक चीनी मिल भी चलती थी। सर्वाधिक आवागमन और भीड़भाड़ वाला क्षेत्र पांडेय बाजार है। यहां मुख्य मार्ग पर ही रेलवे क्रॉसिंग भी है। समय बदलने के साथ ट्रेनों का संचलन बढ़ा, सिंगल से डबल रेल पटरी हो गई तो, सड़क पर आवागमन का दबाव भी बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में पांडेय बाजार रेलवे क्रॉसिंग शहरी आवागमन के लिए मुसीबत बन गई है।
रोजाना दिन में कई बार यहां रेलवे फाटक बंद होने के दौरान घंटों जाम लग रहा है। एक दशक पूर्व से ही यहां ओवरब्रिज के लिए आवाज उठाई जा रही है। पांच साल पहले पांडेय बाजार रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव भी तैयार हुआ। उम्मीद जगी कि कुछ दिनों के बाद ओवरब्रिज निर्माण होने से लोगों को जाम की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। मगर क्रॉसिंग के दोनों तरफ सघन आबादी के लोग दुकान और मकान टूटने के डर से विरोध पर उतर आए, जिससे यह प्रस्ताव निरस्त करना पड़ा। अब यह ओवरब्रिज रेलवे स्टेशन की पश्चिमी केबिन पर चीनी मिल के पास बनेगा। हालांकि पांडेय बाजार की अपेक्षा इस ओवरब्रिज की उपयोगिता उतनी नहीं होगी।
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सर्वे के बाद कमेटी ने प्रस्ताव किया था निरस्त
पांडेय बाजार रेलवे क्रॉसिंग पर प्रस्तावित ओवरब्रिज के लिए कमेटी गठित की गई थी। इसमें रेलवे के निर्माण शाखा, पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम के अधिकारियों को शामिल किया गया था। कई बार सर्वे कार्य होने के दौरान टीम को स्थानीय कुछ व्यापारियों का विरोध झेलना पड़ा। वहीं मकान और दुकानों की बहुलता होने से भी टीम पीछे हट गई। आखिर में इस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया।
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दूसरी बार तैयार हो रहा ओवरब्रिज का प्रस्ताव
रेलवे स्टेशन के पूर्वी केबिन पर ओवरब्रिज का प्रस्ताव दूसरी बार फिर से तैयार किया जा रहा है। पहला प्रस्ताव 46 करोड़ का 2018 में तैयार हुआ था, लेकिन यह ठंडे बस्ते में चला गया। इस बार नारंग रोड से चीनी मिल रोड पर 620 मीटर लंबाई में ओवरब्रिज निर्माण का प्रस्ताव तैयार हो रहा है। इसकी जिम्मेदारी सेतु निगम विभाग को मिली है। ओवरब्रिज पर साढ़े सात मीटर चौड़ी टू-लेन सड़क बनाई जाएगी। इसकी लागत लगभग 60 करोड़ आंकी जा रही है।
पांडेय बाजार में पहले बनना चाहिए ओवरब्रिज
पांडेय बाजार के व्यापारियों और नागरिकों का एक खेमा ओवरब्रिज का प्रस्ताव निरस्त होने से खासा नाराज है। उनका कहना है कि यहां ओवरब्रिज का निर्माण होना सबसे जरूरी है।
दो दशक पहले तक आवागमन का भार कम था। ट्रेनों का संचलन भी उतना नहीं था, जिससे कभी-कभी फाटक बंद होता रहा। तब हम लोगों को उतनी दिक्कत नहीं थी। अब फाटक हर आधे घंटे पर बंद होता है।
-मनोज तरलेजा, पांडेय बाजार।
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पांडेय बाजार में प्रस्तावित ओवरब्रिज निरस्त कर हम लोगों के साथ धोखा किया गया है। आबादी इधर ज्यादा रहती है। अस्पताल, स्कूल, बाजार कहीं भी जाना हो तो अक्सर रेलवे फाटक बंद मिलता है। इमरजेंसी के दौरान हम जाम झेलते हैं।
-मनीष साहू उर्फ शालू, पांडेय बाजार।
प्रस्तावित ओवरब्रिज का स्थल परिवर्तन करना समस्या का हल नहीं है। पांडेय बाजार में इसकी उपयोगिता है। यहां ओवरब्रिज बन जाने से मरीजों का अस्पताल पहुंचना, बच्चों के स्कूल जाने के अलावा अन्य शहरी आवागमन बहाल रहता।
-पंकज कुमार, पांडेय बाजार।
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चीनी मिल के पास ओवरब्रिज निर्माण होने से पांडेय बाजार में जाम की समस्या बनी रहेगी। वर्तमान में अप-डाउन मिलाकर 150 ट्रेनों का संचलन इसी घनी आबादी के बीच से हो रहा है। ऐसे में रेलवे फाटक अक्सर बंद रहता है। हम लोगों की रोज दुर्गति हो रही है।
-मनोज जायसवाल, पांडेय बाजार।
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पांडेय बाजार में प्रस्तावित ओवरब्रिज के सर्वे के दौरान स्थानीय नागरिकों का विरोध सामने आया। इसके अलावा सघन आबादी होने के नाते यहां के कई मकान और दुकान टूट जाते। इस पर लोग राजी नहीं हुए। इस वजह से यह प्रस्ताव टीम को निरस्त करना पड़ा। चीनी मिल के पास प्रस्तावित ओवरब्रिज का डीपीआर तैयार किया जा रहा है।
-इं. राकेश कुमार, सहायक अभियंता, सेतु निगम।