नीरज श्रीवास्तव
बस्ती।
पूर्वांचल में जापानी मस्तिष्क ज्वर व एक्यूट सिंड्रोम इंसेफेलाइटिस (जेई व एईएस) को लेकर सरकार की ‘दस्तक’ गांवों तक होगी। इसके लिए पहले चरण में जिले के सभी 14 ब्लॉकों के 25 गांवों तक स्वास्थ्य विभाग, जल निगम, पंचायती राज विभाग, बाल विकास परियोजना, पशुपालन विभाग, विकलांग कल्याण विभाग, मत्स्य विभाग के अलावा बेसिक शिक्षा विभाग व नगर निकायों को जिम्मेदार बनाया है।
स्वास्थ्य विभाग उन गांवों में जहां टीकाकरण को शत-प्रतिशत पहुंचाएगा वहीं स्वास्थ्य की अन्य सेवाएं से हाईरिस्क गांवों में सुलभ कराई जाएंगी। जेई और एईएस को लेकर सरकार अभी से गंभीर हो गई है। चूंकि इस बीमारी के लिए संवेदनशील माह अप्रैल से शुरू हो जाता है। ऐसे में इस पर नियंत्रण की रूपरेखा तय कर दी गई है। जिले से हाईरिस्क 25 गांवों की सूची शासन को भेजी गई है। ये वे गांव हैं, जहां जेई-एईएस वर्ष 2013 से लेकर 2016 के बीच कम से कम दो बार एईएस अथवा जेई की चपेट में बच्चे आए हैं। जलजनित एईएस को लेकर जल निगम कागज में हाईरिस्क गांवों में इंडिया मार्का पंप से शुद्ध पेयजल उपलब्ध करा रहा है, जबकि धरातल पर अभी इन गांवों में अभी जलापूर्ति को लेकर प्रस्ताव की तैयारी चल रही है।
ये हैं हाईरिस्क गांव
सदर ब्लॉक
खदरा, बनगवां, गनेशपुर, जिगिना, पचीसा
कुदरहा ब्लॉक
दैैजी
सल्टौआ ब्लॉक
बनरही जंगल, औड़जंगल, पचमोहनी व शिवपुर
सांऊघाट ब्लॉक
कोड़रा, भतरिन्हवा, मुजहना
रामनगर ब्लॉक
नरखोरिया, असनहरा
रुधौली ब्लॉक
रुधौली, सेहुड़ा कला, सुरवार खुर्द
बहादुरपुर ब्लॉक
बबुरहिया
बनकटी ब्लॉक
महथा, जयविजय नगर, रामपुर रेवटी, उमरी अहरा
गौर ब्लॉक
बभनगांवा कला व भौखरी
सीएमओ बोले
सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि हाईरिस्क गांवों में स्वास्थ्य विभाग योजनाबद्ध ढंग से जेई-एईएस की जंग के लिए कमर कस चुका है। इसके तहत जहां नौ माह से एक वर्ष तक के बीच बच्चों को इंसेफेलाइटिस का पहला टीका लगाया जाता है वहीं 16 से 24 माह में बच्चों को दूसरा टीका लगाकर इस रोग से निजात की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा विशेष अभियान मिशन इंद्रधनुष में भी इसे लेकर अभियान चलाया गया है। अब नए सिरे से हाईरिस्क गांवों में स्वास्थ्य टीम कार्रवाई करेगी।
बोले जल निगम अभियंता
जल निगम के अधिशासी अभियंता विश्वेश्वर प्रसाद ने कहा कि अभी एक दिन पूर्व ‘दस्तक’ के तहत हाईरिस्क गांवों की सूची मिली है। सूची में जो गांव हैं उन्हें पूर्व में ही संतृप्त करा दिया गया है। इसके अलावा पानी की टंकी से पेयजल आपूर्ति के लिए सर्वे किया जा रहा है, जहां इसकी जरूरत होगी। सर्वे के बाद उसका एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जाएगा।