अचानक पटाखों की तेज आवाज और डीजे के शोर से मैरिज हाल के आसपास के इलाके रोज रात में थर्रा जाते हैं। अव्यवस्था के चलते वाहनों की पार्किंग पटरियों पर होने से शहर की सभी सड़क जाम रहती हैं। अब इस क्षेत्र के नागरिक यह कहने को मजबूर हो गए हैं कि पड़ोस में मैरिज हाल ना बाबा ना...।
शहर में तकरीबन 15 मैरिज हाल हैं। इनमें लगन में शादी तो अन्य दिनों में छोटे-मोटे कार्यक्रम होते रहते हैं। नियमानुसार मैरिज हाल में जहां तमाम सुविधाओं का होना लाइसेंस के लिए जरूरी है वहीं, इनके पास पार्किंग की सुविधा भी होनी चाहिए मगर शहर का कोई भी मैरिज हाल ऐसा नहीं है जिसके पास अपनी कोई पार्किंग हो, जिसमें चार पहिया वाहनों को खड़ा किया जा सके। यह तो हो गई व्यवस्था की बात।
अब डालते हैं उस व्यवस्था पर नजर जिससे आम आदमी की जिंदगी जुड़ी है। मैरिज हाल में शादी के दौरान सड़क पर डीजे के शोर के बीच नाचते-गाते बाराती तो सड़क पर ही तेज आवाज पटाखों का प्रदर्शन यहां लोगों के लिए दर्द बन गया है। सड़क के बीच पटाखों में आग लगाकर आतिशबाजी करने वाले किनारे हो जाते हैं। इसके बाद आग लगे या फिर किसी की जान इससे चली जाए उनका कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का इस पर स्पष्ट आदेश है कि कम आवाज वाले पटाखे छुड़ाए जाएं, वह भी दस बजे रात से पहले, लेकिन यहां तो लोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठेंगे पर रखे हैं। रात चाहे जितनी हो जाए डीजे का शोर थमना नामंजूर है ही, तेज आवाज के पटाखे भी बदस्तूर लोगों की नींद उड़ा रहे हैं। जिम्मेदारों की चुप्पी आम आदमी को दर्द दे रही है।
क्या कहते हैं नागरिक
पटाखों की तेज आवाज से पिता को पड़ा हार्ट अटैक
मालवीय मार्ग स्थित मनोज कुमार का आवास दो मैरिज हालों के बीच में पड़ता है। कहते हैं कि यहां रात काटनी मुश्किल है। क्योंकि मैरिज हाल में शादी होगी तो पूरी रात डीजे की तेज धुन कान के पर्दों को फाड़ने जैसा शोर करता है। बताते हैं कि मेरे पिता भूपति किशोर हार्ट के मरीज थे। उनकी मौत का कारण इन्हीं मैरिज हाल में शादी के दौरान तेज आवाज पटाखों के चलते हो गई। जब यहां पटाखे छूटने लगते हैं तो हम लोग घर से बाहर आ जाते हैं कि कहीं छत न गिर जाए। कभी-कभार तो दो ढाई बजे रात तक यहां आतिशबाजी और पटाखों का शोर दिल दहला देता है।
पटाखों से दीवार में दरार, कान भी प्रभावित
एक मैरिज हाल के बिल्कुल निकट की निवासी श्वेता कहती हैं कि भाई घर के बगल में मैरिज हाल किसी भी कीमत पर नहीं होना चाहिए। कहती हैं कि तेज आवाज पटाखों के चलते उनके घर की चहारदीवारी दरक गई। जिस दिन शादी होती है उस दिन पूरा परिवार परेशान रहता है। दरवाजे पर समारोह में आने वालों की गाड़ियां तो पार्क हो ही जाती हैं। पटाखों के शोर से घर में रहना मुश्किल हो जाता है। देर रात तक तेज आवाज पटाखों के चलते सोना मुश्किल होता है। ऐसे में कान भी प्रभावित होने लगा है। ऐसा करने से इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है, जबकि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश भी है।
पढ़ाई में डीजे का शोर और पटाखों ने पैदा की मुश्किल
हाईस्कूल के छात्र दीपांकर का घर भी मैरिज हाल के पास ही है। कहते हैं कि शादी किसी की दर्द किसी को दिया जा रहा है। आप खुशी मनाएं, मगर दूसरे भी चैन से रहें। इसका ख्याल न तो समारोह के आयोजकों को होता है और न मैरिज हाल प्रबंधन को ही। वे अपने परिसर में एक बोर्ड टांग कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं। जबकि उन्हें पहले ही समारोह आयोजकों को नियम कानून समझा देना चाहिए। यदि वे नहीं मानते हैं तो इसकी शिकायत भी दर्ज करानी चाहिए, मगर वह तो मोटी रकम लेकर अपने घर आराम की नींद सोते हैं, जबकि पूरा मोहल्ला परेशान होता है।
रिश्तेदार भी रुकने से कतराने लगे हैं
इसी स्थान की रहने वाली रेनू श्रीवास्तव कहती हैं कि मैरिज हाल के निकट घर नहीं होना चाहिए। क्योंकि हाल के मालिक धन लेकर समारोह के आयोजकों को पूरी छूट दे देेते हैं। अब रात को समारोह में डीजे का शोर पूरे मोहल्ले के लिए सिरदर्द हो जाए उनकी बला से। सड़क पर पटाखों के शोर से चाहे किसी की जान जाए चाहे किसी का घर जले उनको इसकी चिंता नहीं है। बस वे पैसा लिए और इंतजाम किए। यही नहीं प्रशासन व पुलिस भी चुप्पी साधे रहती है। इन स्थितियों के चलते अब घर पर कोई रिश्तेदार रात में रुकने तक को तैयार नहीं होते। क्योंकि एक बार रिश्तेदारी के लोग पांच दिन के लिए आए थे। उनके पास एक नवजात शिशु भी था। रात भर बच्चा रोता रहा। उसके कान में रुई आदि डाल दी गई, मगर वह चुप नहीं हुआ। सुबह वह लोग यह कहते हुए चले गए कि यहां रुकना खतरे से खाली नहीं है।
बोले डॉक्टर
नाक, कान, गला विशेषज्ञ डॉ. राजेश त्रिपाठी कहते हैं कि कान केवल 80 से 90 डेसीबल शोर को बर्दाश्त कर सकता है। आजकल जो पटाखे हैं उनका आवाज 250 से 300 डेसीबल होता है। यह पर्यावरण को जहां नुकसान पहुंचा रहा है वहीं, मैरिज हाल के आसपास रहने वालों के कान को भी प्रभावित कर रहा है। तेज आवाज से कान की नसें कमजोर हो जाती हैं और कभी-कभार तो पर्दा भी फट जाता है। इस पर पूरी तरह रोक होनी चाहिए।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. इकबाल कहते हैं कि तेज आवाज पटाखों से जहां बालिग के कान प्रभावित होते हैं, वहीं नवजात शिशु पर भी इसका उतना ही असर होता है। सबसे ज्यादा दिक्कत ब्लड प्रेशर व हृदयरोग के मरीजों को होती है। तेज आवाज पटाखों के चलते कभी कभार जान भी चली जाती है। कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का रोक भी है, मगर जब पालन कराने वाले चुप्पी साधे हैं तो भला कौन बोल सकता है। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जरूरत है। कठोर दंड के प्राविधान से ही यह संभव है।
मैरिज हाल संचालक की प्रतिक्रिया
शहर के ब्लॉक रोड स्थित एक मैरिज हाल के संचालक हरविंदर पाल कहते हैं कि पटाखों व डीजे को लेकर समारोह के आयोजकों को बता दिया जाता है, मगर वे भीड़ हो जाने के बाद नियम कानून को ताक पर रख देते हैं। इन स्थितियों में जब उन्हें मना किया जाता है तो वे उखड़ कर झगड़ा करने पर आमादा हो जाते हैं। इसे रोकने के लिए पुलिस को सहयोग करना होगा।
मैरिज हाल संचालक संजीव कुमार कहते हैं कि नियम कानून के संबंध में समारोह के संचालकों को बता दी जाती है, मगर वे मानें तब न। तेज आवाज पटाखों को छुड़ाने से भी रोका जाता है, मगर यहां कोई किसी की नहीं सुनता। रही पार्किंग की बात तो बाइक के लिए पार्किंग है, मगर कार के लिए नहीं है। लोग सड़क की पटरियों पर गाड़ी खड़ी कर दें तो हम क्या कर सकते हैं।
खुशी पर झिझकती है पुलिस
शहर कोतवाल बृजेंद्र सिंह कहते हैं कि शादी के खुशनुमा माहौल में जो लोग तेज आवाज पटाखे फोड़ते हैं अथवा डीजे का शोर करते हैं उनके खिलाफ पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई तो नहीं की, मगर कानून की नजर में यह गलत है। परंपरा के चलते पुलिस थोड़ा झिझकती है, यदि कहीं से कोई शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई होगी। वैसे इस पर पुलिस नजर रख रही है। सभी मैरिज हाल संचालकों को यह बता दिया गया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करेगी।
प्रशासन कसेगा शिकंजा
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एसडीएम सदर चंद्रमोहन गर्ग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का शत प्रतिशत पालन कराया जाएगा। डीजे का शोर और तेज आवाज पटाखों को प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके लिए सभी मैरिज हाल संचालकों को दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं। रात में डॉयल 100 की टीम भी इस पर निगरानी करेगी। किसी को भी कानून हाथ में लेने नहीं दिया जाएगा।