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Basti News: अध्यक्ष जी! चुनौतियां बड़ी हैं, कैसे करेंगी सामना

Wed, 17 May 2023 12:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा।
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बस्ती। 70 साल पुरानी जनपद की एक मात्र नगर पालिका में फिर नई सरकार बनी है। वार्डवार सभासद और नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में जनता ने अपना नुमाइंदा चुन लिया है। अब गेंद नवगठित सरकार के पाले में है। नई सरकार के सामने यह बड़ी चुनौती है कि शहर की तस्वीर बदलने में वह कैसे कामयाब होगी। विकास के आईने में कुछ नया दिखा पाएंगी या पूर्व की भांति परंपरागत कार्यों के निर्वहन तक ही पूरी दौड़ रहेगी। बहरहाल, अपने शहर को विकास की दरकार अभी भी है। नाली, पानी, बिजली, सड़क, शौचालय, जलनिकासी जैसी जरूरी सुविधाओं को मुहैया कराने की जद्दोजहद खत्म नहीं हुई है। इसके लिए सबसे पहले जवाबदेही नगर पालिका अध्यक्ष की तय होती है। इसलिए नई अध्यक्ष जी के समक्ष भी चुनौती बड़ी है। उनकी काबिलियत और कार्यक्षमता यह तय करेगी कि शहर की जटिल समस्याओं से नागरिकों को किस हद तक छुटकारा मिलेगा।
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डेढ़ दशक से सीवरेज सिस्टम प्लांट की तैयारी
शहर में जलनिकासी की समस्या बहुत जटिल है। असल में जब निकाय का गठन हुआ था तब आबादी यहां की महज बीस हजार थी। उस हिसाब से 25 किलोमीटर लंबाई में नालों का निर्माण हुआ था। वर्तमान में यहां की आबादी डेढ़ लाख हो गई हैं। मोहल्लों का काफी हद तक विस्तार हो गया है। वार्डवार नवीन बस्तियों में जलनिकासी की व्यवस्था बिल्कुल नहीं है। दो दशक से यहां सीवर लाइन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। वर्ष 2007 में नगर पालिका की तरफ से शहर के 25 वार्डों में सीवर लाइन बिछाने की कवायद शुरू हुई। लेकिन यह मूर्त रूप नहीं ले सकी। वर्ष 2017 में नगर पालिका चुनाव के बाद एक बार फिर सीवरेज सिस्टम प्लांट स्थापित करने की तैयारी शुरू हुई। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष रूपम मिश्र एवं सांसद हरीश द्विवेदी की पहल पर ढाई सौ करोड़ की कार्य योजना तैयार हुई। वित्तीय स्वीकृति के लिए इस डीपीआर को केंद्र में भेजा गया। लेकिन यह ठंडे बस्ते में चला गया।

कूड़ा प्रबंधन का इंतजाम नहीं
कूड़ा प्रबंधन के लिए नगर पालिका परिषद की ओर से पांच साल पहले प्रयास शुरू किए गए। शहर से बीस किलोमीटर दूर कोईलपुरा गांव में ढाई हेक्टेयर जमीन भी अधिग्रहित की गई। पांच करोड़ की कार्ययोजना बनी। इसके कूड़ा निस्तारण कर जैविक खाद्य एवं अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने की तैयारी थी। लेकिन तत्कालीन जिम्मेदार इस परियोजना साकार रूप देने में सफल नहीं हो पाए। वर्तमान में अधिग्रहित स्थल पर कूड़े का ढेर लगा हैं।
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ट्रैफिक सिग्नल की व्यवस्था चरमराई
शहर में सुगम यातायात के लिए कंपनीबाग, रोडवेज, अस्पताल चौराहा पर ट्रैफिक सिग्नल की व्यवस्था सात साल पहले की गई थी। उम्मीद थी कि इस व्यवस्था में विस्तार होगा। लेकिन तीन साल बीतते-बीतते यह व्यवस्था ध्वस्त हो गई। वर्तमान में शहर का एक भी ट्रैफिक सिग्नल काम नहीं कर रहा है।

अतिक्रमण की जद में आधा शहर
यहां अतिक्रमण की समस्या भी ला-इलाज है। कई अभियान भी चलाए गए लेकिन कुछ ही दिनों के बाद स्थिति जस की तस बन जाती है। गांधीनगर, अस्पताल चौराहा, रोडवेज, पुरानी बस्ती, पांडेय बाजार एवं मंगलबाजार में अतिक्रमण की वजह से सड़क पर चलने लायक नहीं रहता है। जनप्रतिनिधि दुकानदारों एवं पटरी व्यवसायियों के अतिक्रमण को हटवाने से कतराते हैं। इसलिए यह समस्या बनी हुई है।

नगर पालिका के पास आय का ठोस स्रोत नहीं
नगर पालिका के पास आमदनी का कोई ठोस स्रोत नहीं है। पुरानी व्यवस्था के तहत गृहकर, जलकर ही आमदनी का मुख्य साधन है। कुल मिलाकर सालाना आमदनी औसतन 50 लाख की है। जबकि शहर को सुंदर, स्वच्छ एवं सुविधा युक्त बनाने में अरबों रुपये की जरूरत पड़ती है। ऐसे में पूरे पांच साल शासन बजट मिलने का ही इंतजार रहता है। इसलिए धन का इंतजाम करने में भी नगर पालिका अध्यक्ष की अहम भूमिका होती है।
तैयार कर लिया है खाका, खत्म होंगी समस्याएं
देखिए, वर्तमान में नगर पालिका की हालत दयनीय है। यह हम सभी जानते हैं। पालिका का कोष खाली है। लेकिन विकास कार्यों को गति पकड़ाना है। नगर पालिका को विषम परिस्थितियों से उबारने के लिए ही जनता ने हमें चुना है तो चुनौती बड़ी हो या छोटी इसका सामना भी हमें करना होगा। अभी शपथ नहीं हुआ है, लेकिन शहर के विकास का खाका हमने तैयार कर लिया है। बड़े शहरों की भांति यहां भी भूमिगत पार्किंग का निर्माण हमारे एजेंडे में है। आमदनी बढ़ाने के लिए दुकानों का निर्माण कर आवंटन और टैक्सी स्टैंडों को सुविधायुक्त बनाकर संचालन किया जाएगा। सीवर लाइन, कूड़ा प्रबंधन, सड़क निर्माण जैसी परियोजनाओं के लिए शासन से बजट लाया जाएगा। विपक्षी दल से भले ही हम चुनकर आए है बजट के लिए लड़ाई लड़ती रहूंगी। नेहा वर्मा, नवनिर्वाचित अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, बस्ती।
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