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Basti News: तैयारियाें ने बचाई मूर्तियों की बेकद्री, दोपहर तक खाली हो गया अमहट घाट

Thu, 09 Oct 2025 02:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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अमहट घाट पर विसर्जन के बाद मूर्तियों से खाली कर दिया गया गड्ढा।
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बस्ती। इस बार मूर्ति विसर्जन का प्रबंध बढि़या था। परंपरा का भरपूर पालन भी हुआ प्रदूषण से तत्काल मुक्ति भी मिली। पर्यावरण का भरपूर ख्याल रखा गया। अमहट घाट पर कुआनो नदी में मूर्तियों को डालने के बजाए एक गड्ढे में क्रेन की मदद से रखवा दिया। सुबह भीड़ कम होते ही नगर पालिका की टीम मूर्तियों के प्रबंध में जुट गईं। बुलडोजर की मदद से मूर्तियों को तत्काल डंपर में लादकर डंपिंग जोन कोइलपुरा पहुंचाया जाने लगा। इससे मूर्तियां नोच खसोट से बच गईं। दोपहर तक अमहट घाट पर मूर्तियों का अवशेष तक नहीं दिखा।
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मूर्तियों के सजावट में इस्तेमाल कुछ उपयोगी सामान का मलबा किनारे पड़ा था। उसी में चार-छह बच्चे खोजबीन करते देखे गए। बाद में उसे भी हटा दिया गया। लोगों का कहना था कि मूर्तियों की संख्या भले ही अधिक थीं लेकिन, प्रशासन ने प्रदूषण मुक्त विसर्जन का बेहतरीन इंतजाम किया था। रात दस बजे से ही मूर्तियों को घाट के पास बनाए गए एक बड़े गड्ढे में बुलडोजर और क्रेन के जरिये रखा जाने लगा। नदी में एक भी मूर्ति फेंकने नहीं दी गई।
हर बार विसर्जन में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को नदी के तट पर फेंक कर लोग चल देते थे। सुबह उसमें से ज्वैलरी, कपड़ा, नोटों की माला समेत अन्य वस्तुओं की नोच खसोट के लिए बच्चे, जवान, महिलाएं टूट पड़ते थे। इससे मूर्तियों का अनादर होता था। इस बार विसर्जन में मूर्तियों के आदर की परंपरा बरकरार मिली। इको फ्रेंडली विसर्जन के इंतजाम कारगर साबित हुए।
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लगभग दो हजार की संख्या में मूर्तियों का विसर्जन सुबह आठ बजे तक हुआ। इसके बाद भी एक भी मूर्ति नदी में नहीं डाली गई। प्रशासन की सक्रियता से नदी के किनारे का अमहट घाट भी दिन में 12 बजे के बाद साफ दिखने लगा। गड्ढे में रखी गई मूर्तियों को तत्काल शहर से 20 किमी दूर कोइलपुरा डंपिंग जोन में पहुंचाने की व्यवस्था बना ली गई।
नगर पालिका की टीम बुलडोजर, ट्रैक्टर ट्राली और डंपर के साथ जुट गई। बुलडोजर के जरिये गड्ढे में रखवाई गई मूर्तियों को तत्काल डंपर और ट्रैक्टर ट्राली पर रखकर रवाना किए जाने लगा। दोपहर बाद एक भी मूर्ति का अवशेष नहीं बचा। सजावट के कुछ सामान बचे हुए थे जिसे बाद में छोटे वाहनों से ढोकर डंपिंग जोन में पहुंचा दिया गया। नदी भी प्रदूषित होने से बच गई।
नहीं मिला उपयोगी सामान : विसर्जन स्थल पर कुछ बच्चों और युवकों की टीम उपयोगी सामान की तलाश में जुटी रही। जिस गड्ढे में मूर्तियां रखवाई गई थीं, नगर पालिका की टीम उसमें घुसने से मना कर दी। बुलडोजर से मूर्ति लादने के कारण नोच-खसोट का मौका भी नहीं मिला। गड्ढे के बाहर बच्चे कलश, लकड़ी, कपड़े, आभूषण आदि रौंदते हुए कीमती सामान ढूंढ़ रहे थे। किसी के हाथ कुछ लगा तो किसी का हाथ खाली रह गया। रिंकू, नन्हें, पिंटू आदि ने बताया कि इस बार विसर्जन के तुरंत बाद मूर्तियों को हटा दिए जाने से हम लोग कुछ भी नहीं पाए। पिछले बार तो तमाम सामान एकत्र कर लिए थे। कलश, साड़ी, नथिया, माला आदि इकट्ठा करके घर ले गए थे। इस बार कुछ खास नहीं मिला। वहीं नदी में घुसकर सामग्री की तलाश कर रहे दीपू ने बताया कि बांस की फट्टी भी इस बार नहीं मिल रही है। नदी में मूर्ति नहीं फेंकने से मेहनत बेकार हो गई।

अमहट घाट पर विसर्जन के बाद मूर्तियों से खाली कर दिया गया गड्ढा।

अमहट घाट पर विसर्जन के बाद मूर्तियों से खाली कर दिया गया गड्ढा।

अमहट घाट पर विसर्जन के बाद मूर्तियों से खाली कर दिया गया गड्ढा।

अमहट घाट पर विसर्जन के बाद मूर्तियों से खाली कर दिया गया गड्ढा।

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