घरों में अदा की गई अलविदा की नमाज
नगर बाजार(बस्ती)। रमजान उल मुबारक के आखिरी जुमा में अलविदा की नमाज के साथ शुक्रवार को माहे मुबारक के रुखसत होने का एलान हो गया। कोरोना कर्फ्यू की वजह से अलविदा जुमे की नमाज रोजेदारों ने मस्जिदों की जगह घरों में अदा की। अलविदा की नमाज में कोरोना वायरस के खात्मे की दुआएं भी मांगी गई।
रमजान के महीने में आखिरी जुमा यानी शुक्रवार को अलविदा जुमा कहा जाता है। इस अलविदा जुमे के बाद लोग ईद की तैयारियों में लग जाते हैं। जुमा अलविदा रमजान माह के तीसरे अशरे मतलब आखिरी दस दिन में पड़ता है। तीसरा अशरा निजात का अशरा होता है। इस जुमे को साल भर पड़ने वाले जुमे से अव्वल (बेहतरीन) माना जाता है। इस साल अलविदा जुमा का नमाज देशभर में मस्जिद के बजाय अकीदत मंदों ने घरों में अदा की। अलविदा जुमे की नमाज का विशेष महत्व है। यह अफजल जुमा होता है। इससे जहन्नुम से निजात मिलती है। यह आखिरी अशरा है, जिसमें एक ऐसी रात होती है जिसे तलाशने पर हजारों महीने की इबादत का लाभ एक साथ मिलता है। उस रात को शब-ए-कद्र की रात कहते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण रात 27वें रोजे को होती है। उलमा बताते हैं कि इस रात को अल्लाह बंदे के काफी करीब होते हैं। उस रात को जो भी दुआ अकीदतमंदों की ओर से की जाती है, उसे अल्लाह कुबूल करते हैं। क्षेत्र के जामा मस्जिद नगर बाजार, बिरऊपुर, रानीपुर, बहादुरपुर, पोखरा बाजार, पोखरनी, दयालपुर, महनहिया, बेईली समेत तमाम ग्रामीण क्षेत्रों में अलविदा जुमे की नमाज मस्जिदों के बजाय लोगों ने घरों में जुहर की नमाज अदा की और कोरोना संक्रमण से निजात व मुल्क मे अमन शांति व भाईचारा की दुआ की।
कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर पढ़ी नमाज
बनकटी। कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के चलते रमजान महीने के आखिरी जुमा की रौनक फीकी रही। शारीरिक दूरी का पालन करते हुए महज पांच की संख्या में ही अकीदतमंदों ने मस्जिदों में अलविदा की नमाज अदा की। शेष लोगों ने घरों में जुहर की नमाज अदाकर रब की बारगाह में मगफिरत और कोरोना से निजात की दुआएं मांगी। बनकटी क्षेत्र के बानपुर, मुरादपुर, बजहां, अहिरौली, डिवहारी, मथौली, बरहुआं, ख़िरहुआं, बनकटी कस्बा, देवमी, नेवारी, सोभनपार आदि गांव के मस्जिदों में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर सिर्फ पांच की संख्या में अकीदतमंदों ने नमाजे अलविदा अदा कर कोरोना से निजात के लिए रब की बारगाह में दुआ मांगी। संवाद