संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के धौरहरा गांव के बंद पड़े विद्यालय में जला हुआ शव मिलने का रहस्य गहराता जा रहा है। परिवार के लोगों के अलावा कोई भी यह मानने को तैयार नहीं है कि वह शव जामवंत शर्मा का था। इसके पीछे किसी के पास कोई ठोस आधार नहीं है।
मगर, जामवंत की आम शोहरत और घटनाक्रम को मद्देनजर लोग यह मान रहे हैं कि उसकी इतनी आसानी से हत्या कर शव को जलाया नहीं जा सकता।
उधर, पुलिस करीब पांच सौ मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाकर सुराग खोजने की कोशिश कर रही है। सीओ सिटी सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी ने टीम के साथ शनिवार को भी गांव का दौरा किया। घटना स्थल से लेकर उसके घर तक जाने के रास्तों पर छानबीन की। सीओ ने बताया कि अभी किसी नतीजे पर पुलिस नहीं पहुंच पाई है कि वह शव जामवंत का है या किसी और का है। पुलिस के सामने अब दो सवाल हैं।
पहला कि वह शव अगर जामवंत का है तो किस वजह से किसने उसकी हत्या की। दूसरा यह कि यदि वह शव जामवंत का नहीं है तो किसका है। आसपास का कोई लापता भी नहीं है, जिसका शव होने की पुलिस संदेह करती।
शुक्रवार को मौके से राख छनवाई गई थी, जिसमें कुछ दांत और हड्डियां मिली हैं। पुलिस उन सबका नमूना डीएनए जांच के लिए भेज रही है। पुलिस अब तक करीब 10 संदिग्धों से पूछताछ कर चुकी है। मगर, कोई दिशा नहीं मिल सकी।
बता दें कि वाल्टरगंज क्षेत्र के धौरहरा निवासी जामवंत शर्मा (45) पुत्र लाल बिहारी शर्मा पास के परसा सूरत गांव में शिक्षामित्र थे। उसने गांव में करीब 15 वर्ष पहले विद्यालय खोला था। विद्यालय की मान्यता पांचवीं तक थी।
मगर, इंटर तक की पढ़ाई होती थी। 2014 में एक हत्याकांड में जेल भेजे जाने की वजह से विद्यालय बंद हो गया था।
जमानत पर बाहर आने के बाद विद्यालय का संचालन फिर शुरू हुआ। मगर, अप्रैल 2024 से इस स्कूल को अपरिहार्य कारणों से फिर बंद कर दिया गया।
इसके बाद जामवंत ने शटरिंग का व्यवसाय शुरू कर दिया। स्कूल के कमरों में वह शटरिंग का सामान रखा था।
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