बस्ती जिले में गबन के मुकदमे में वांछित आरोपी को रविवार को शहर से गिरफ्तार किए जाने के बाद अगले दिन सोमवार को सीजेएम कोर्ट ने मुंबई पुलिस की ट्रांजिट रिमांड की अर्जी खारिज कर दी, जिससे मुंबई पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। मुकदमे में अधिकतम सात साल तक की सजा होने के कारण न्यायालय ने गिरफ्तारी को विधि विरुद्ध करार दिया। बाद में आरोपी को निजी मुचलके पर जमानत भी दे दी गई।
मुंबई पुलिस के अनुसार महाराष्ट्र के ओशीवारा थाने में बस्ती के कोतवाली क्षेत्र के जयपुरवा मुहल्ला निवासी सूर्यांश उर्फ श्याम सुंदर तिवारी के विरुद्ध गबन का केस दर्ज है। मामले की विवेचना कर रहे एएसआई संदीप पाटिल मुंबई पुलिस टीम के साथ आरोपी की तलाश में रविवार को बस्ती पहुंचे। यहां स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी सूर्यांश को उसी दिन धर दबोचा। अगले दिन मुंबई पुलिस ने आरोपी को तीन दिनों के ट्रांजिट रिमांड के लिए सीजेएम कोर्ट में पेश किया।
अभियोजन पक्ष से दलील दी गई कि तीन साल पहले आरोपी मुंबई के ओशीवारा थाना क्षेत्र के एक सीएनसी गैस स्टेशन पर सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था। वह संबंधित कंपनी का पांच लाख रुपये गबन कर भाग निकला। इस मामले में मुंबई की ओशीवारा पुलिस ने केस दर्ज किया था। आरोपी के पक्ष से अधिवक्ता एसएन दुबे ने तर्क दिया कि गबन में अधिकतम सात वर्ष तक की सजा है, जिसमें सामान्य परिस्थिति में गिरफ्तारी विधि विरुद्ध है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद सीजेएम आशीष कुमार राय ने मुंबई पुलिस की 21 से 23 अगस्त तक ट्रांजिट रिमांड की याचिका खारिज कर दी।
बाद में आरोपी सूर्यांश को निजी मुचलके पर जमानत दे दी गई। मुंबई पुलिस की केस डायरी में गिरफ्तारी का स्पष्ट कारण अंकित न होने पर न्यायालय ने एतराज किया। मजिस्ट्रेट ने कहा कि रिमांड के लिए मजबूत आधार होना चाहिए। उन्होंने मुंबई पुलिस को हिदायत दी कि भविष्य में ऐसे मामलों में बिना मजबूत आधार के ट्रांजिट रिमांड की याचिका न दायर की जाए, जिससे मुंबई पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा।