संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मेहमान नवाजी का लोकप्रिय पेय चाय नक्कालों के चलते संदिग्ध होती जा रही है। चाय का प्याला हाथ में लेकर अब तो मजाक में लोग रिश्तेदार और दोस्त चुटकी लेने लगे हैं कि कहीं चमड़ा रंगने वाली पत्ती की चाय तो नहीं है। पूछने पर बताते हैं कि लखनऊ में केमिकल मिलाकर और गोरखपुर में चमड़ा रंगने वाला रंग मिलाकर चायपत्ती की सप्लाई करने का भंडाफोड़ हो चुका है।
इसलिए क्या भरोसा कि उन्हीं नक्कालों की सप्लाई की हुई पत्ती से बनी चाय न हो। संदेह इसलिए और भी गहराता जा रहा है, क्योंकि शहर में खुली चायपत्ती बेचने वाले अधिकतर दुकानदार लखनऊ और गोरखपुर से ही माल मंगाते हैं। सूत्र बताते हैं पूर्वांचल में नेपाल के सटे जिलों बहराइच और लखीमपुर खीरी से बड़ी मात्रा में बोरियों और प्लास्टिक की थैलियों में मिलावटी चायपत्ती आ रही थी।
अब लखनऊ, बाराबंकी और गोरखपुर भी इसका गढ़ बनता जा रहा है। 10 दिन पहले एसटीएफ ने लखनऊ में इस गिरोह को पकड़ा था, जो चायपत्ती में गेरू, हार्ड स्टोन पाउडर व अन्य केमिकल, रंग आदि मिलाकर अलग-अलग ब्रांड के पैकेटों में पैक करते थे और प्रदेश भर में आपूर्ति करते थे।
इससे पहले 2024 में बस्ती में भी इस तरह की एक क्विंटल चायपत्ती पकड़ी गई थी। शुक्रवार को गोरखपुर में चमड़ा रंगने वाला केमिकल मिलाकर बेची जा रही चायपत्ती पकड़ी गई।
बताया जा रहा है कि मिलावटी चायपत्ती की खपत ग्रामीण कस्बों में ज्यादा हो रही है। न्याय मार्ग स्थित एक दुकानदार ने बताया कि खुली चायपत्ती सस्ती मिलती है।
उसका रंग भी ग्राहकों को खूब पसंद आता है। जानकार बताते हैं कि इन दुकानों पर चायपत्ती के ही कमाल से गाढ़ी एवं चटख रंग की कड़क चाय मिलती है।
इस प्रकार कर सकते हैं पहचान ःखाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक मिलावटी चायपत्ती में छोटे-छोटे लाल रंग के कण दिखाई देते हैं। एक साथ दो गिलास पानी सामने रखें। एक गिलास में ब्रांडेड कंपनी की एक चम्मच चायपत्ती डालिए और दूसरे में यह जहरीली चायपत्ती डालिए।
ब्रांड वाली चाय पत्ती धीरे-धीरे नीचे जाएगी और हल्का हल्का रंग आता है। जबकि रसायन वाली चायपत्ती घुलते ही नीचे चली जाती है और पानी हल्का लाल रंग का हो जाता है।