राजकीय कन्या इंटर कछिया परिसर मे धान की खेती।
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जीजीआईसी में शिक्षकों का अभाव, लहलहा रहे ‘मैदान’ में धान
बभनान। गौर ब्लॉक के कछिया में बना राजकीय कन्या इंटर कॉलेज कभी बेटियों के लिए वरदान था। लेकिन अब शिक्षकों के अभाव में छात्राओं का कॉलेज से मोह भंग हो गया है। वर्तमान सत्र में हाई स्कूल व इंटर कक्षाओं में महज 30 छात्राओं का नामांकन हो पाया है। मजे की बात यह है कि जिस मैदान पर बेटियां खेलकूद कर जिले का नाम रोशन करती थीं। वहां अब धान की फसलें लहलहा रही हैं। कार्यवाहक प्रधानाचार्य का कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण छात्राएं नामांकन कराने से कतरा रही हैं।
गौर ब्लाक के कछिया में स्थित इस विद्यालय के लिए 2012-13 में नए भवन का निर्माण कराया गया। इस पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किए गए। भवन के तीन कमरों में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं तो पांच कमरों को शिक्षण कार्य के लिए बनाए गए। इसी में प्रधानाचार्य का निवास है। इसके अतिरिक्त भवन के कमरों पर ताले लटक रहे हैं। कंप्यूटर खराब है। कॉलेज परिसर में झाड़ियां पहचान बन गई है। वैसे तो यहां नौ प्रवक्ता, सात पद सहायक अध्यापक, तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मी व दो लिपिक के पद सृजित हैं। लेकिन अब दो सहायक शिक्षक व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी के अलावा दो अल्पकालिक शिक्षकों से काम चल रहा है। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने विद्यालय की पड़ताल की तो पता चला कि यहां दो अल्पकालिक शिक्षक पटेश्वरी गुप्ता व शिवबरन निषाद ही पढ़ा रहे हैं। सहायक अध्यापक प्रभारी प्रधानाचार्य मीनाक्षी जायसवाल व माधुरी सिंह अवकाश पर हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मी रामदेव, लिपिक रमेशधर द्विवेदी भी मौजूद नहीं मिले। कनिष्ठ लिपिक अशोक कुमार गौतम का संबद्धीकरण अभिनव विद्यालय बभनान कर दिया गया है। कक्षा नौ में पांच, हाई स्कूल में छह, कक्षा 11 में ग्याहर तो कक्षा 12 में आठ छात्राओं का नामांकन किया गया है। विद्यालय में आधुनिक प्रयोगशाला बेकार हो रही है। यहां मंगाए गए 10 कंप्यूटर जीर्ण शीर्ण हो चुके हैं।
कार्यवाहक प्रधानाचार्य मीनाक्षी जायसवाल ने बताया बिजली न होने से कंप्यूटर बेकार हो गए हैं। विद्यालय को परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाने के कारण अभिभावक नामांकन नहीं करा रहे हैं। बताया कि शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी समस्या है। रही धान बुआई करने की बात तो पिछले दिनों निरीक्षण करने आए जेडी के निर्देश पर यहां खाली पड़े मैदान का उपयोग धान बुआई कर किया गया है।