उर्दू भाषा में लिखा एक छोटा पन्ना भी मिला था। इसके अलावा हैंडबैग से पांच पन्नों की शीट मिली थी। जिसके प्रत्येक पन्ने पर क्रमांक, टोकन नंबर, नाम, मंडल, जिला, पंच, किक, ब्लॉक, एहॉक, एसएनके, स्ट्रीट, स्टेमिना, रिमार्क के कॉलम बने थे। प्रत्येक कॉलम में अलग-अलग व्यक्तियों का विवरण कोडिंग में लिखा था।
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एक पर्ची पर एकाउंट, राशिद पॉप पासवार्ड, मेल आईडी भी लिखी थी। इन दस्तावेजों की जांच के बाद पता चला कि वह देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त है। पुलिस ने इस मामले में एसटीएफ गोरखपुर के उप निरीक्षक सूरजनाथ सिंह की तहरीर पर आईपीसी की धारा 121 ए, 420, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
बाकी धाराओं की तफ्तीश करके चार्जशीट न्यायालय में भेज दी गई, मगर धारा 121 ए के बारे में शासन की अनुमति न मिलने के कारण मुकदमा नहीं चलाया जा सका। एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी ने बताया कि अनुमति मिलने के बाद उस पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाएगा।