संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। चीन के लहसुन से सेहत ही नहीं अर्थव्यवस्था भी छिन्न-भिन्न हो रही है। इसके इस्तेमाल का नफा-नुकसान समझने के बाद लोग खुद चीन के लहसुन को नजरअंदाज करने लगे हैं। अब चमक-दमक वाले लहसुन की जगह अधिकतर लोग देसी की मांग कर रहे हैं।
शहर ही नहीं, बल्कि कस्बों तक के दुकानदारों का कहना है कि तीन-चार दिन से देसी लहसुन की मांग बढ़ी है। गांधीनगर में ठेला लगाकर फुटकर लहसुन बेचने वाले लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं कि पहले वह दोनों तरह का लहसुन रखते थे।
ग्राहक बड़े दाने वाले चीन वाले लहसुन को तरजीह देते थे। उस पर रोक लगने के बाद इसकी जांच होने लगी तो चीन वाला लहसुन रखना बंद कर दिया। इसके बाद दुकानदारी ही नहीं हो रही थी। इधर तीन-चार दिन से 15-20 किलो की दुकानदारी होने लगी है।
पुरानी बस्ती में थोक सब्जी का व्यवसाय करने वाले अब्दुल समद बताते हैं कि लहसुन में स्वाद की चाहत रखने वाले समझ गए हैं कि चीन का लहसुन देखने में भले बड़ी और चमकदार लगे। मगर, असली स्वाद देसी में है। क