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अपराधियों से ज्यादा फरेबियों का आतंक

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अपराधियों से ज्यादा फरेबियों से परेशान हैं लोग
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बस्ती। चोर-उचक्कों या लूटपाट करने वाले बदमाशों का उतना खौफ नहीं है, जितना जालसाजों और फरेबियों का है। कहीं सरकारी अभिलेख में हेरफेर करके रुपये बनाने में जुटे हैं तो कोई तकनीकी दांवपेच से लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने में मशगूल है। प्रकरण पुलिस तक पहुंचने के बाद तमाम आरोपी पकड़े भी जा रहे हैं, लेकिन उनकी कारगुजारी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
तीन दिन पहले कोतवाली पुलिस ने विकास भवन के पास से दो जालसाजों को गिरफ्तार किया था, जो एक सिगरेट कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर लाखों रुपये हड़प चुके थे। पिछले हफ्ते गौर थाने की पुलिस ने एक गिरोह के दो युवकों को पकड़ा था। इनमें एक जनसेवा केंद्र का संचालक और दूसरा एसबीआई शाखा में काम करने वाला अनुचर था। केंद्र संचालक आधार कार्ड से लिंक खातेदारों के कागजात जुटाता था। जबकि अनुचर बैंक में कंप्यूटर पर लोगों के खाते का मोबाइल फोन नंबर बदल देता था। ताकि ओटीपी उसके बताए मोबाइल फोन पर आए। ऐसा करके दोनों ने तमाम लोगों के रुपये हड़प लिए। इसके पहले नकली शराब, मिलावटी मोबिल ऑयल, नकली उर्वरक व सीमेंट आदि की बरामदगी की जा चुकी है। तकनीकी जालसाजों ने आर्थिक अपराध के लिए सोशल मीडिया का बखूबी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। हाल में ही दूसरे का फेसबुक एकाउंट हैक करके डुप्लीकेट एकाउंट बनाने के मामले खूब आने लगे थे। फेसबुक मैसेंजर के जरिए करीबी बनकर मदद के नाम पर रुपये मंगाया जाता है। यह जालसाज परिचित व करीबी लोगों को भावनात्मक रूप से फंसाते हैं।
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सस्ते वाहन का देते हैं झांसा
डेढ़ महीने पहले मध्य प्रदेश का एक गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ा था जो ऑनलाइन सेकेंड हैंड वाहन बेचता था। फेसबुक पर लिंक भेजकर सेना से नीलाम बताकर तमाम जीप, बोलेरो उम्मीद से काफी कम दाम पर बेचने का झांसा देते हैं। यदि किसी ने उनके मॉडल को पसंद कर लिया तो समझ लें कि उसका जालसाज के जाल में फंसना तय है। कभी पंजीकरण के बहाने तो कभी बीमा और रोड टैक्स कहकर अपने एकाउंट में तब तक रुपये मंगाते रहते हैं, जब तक भेजने वाला समझ न जाए कि उसके साथ खेल हो गया।
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एसपी बोले, सावधानी ही बचाव
एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि तकनीकी के दौर में सावधानी ही बचाव है। बिना अच्छी तरह से जाने-समझे ऑनलाइन लेनदेन में काफी जोखिम है। इसलिए पहले से सतर्क रहें। वैसे पुलिस के पास जो शिकायतें आती हैं उनमें मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
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