बस्ती। नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को माता के ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना की गई। श्रद्धालुओं ने ब्रह्मचारिणी से तप और चंद्रघंटा सेतेज का वरदान मांगा।
शहर से कस्बों और ग्रामीण क्षेत्र के मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए सुबह से ही भीड़ उमड़ पड़ी। शहर के स्टेशन रोड स्थित काली मंदिर, गांधीनगर हनुमान मंदिर, दुर्गा मंदिर कटरा, बैडवा मंदिर भानपुर, कप्तानगंज दुर्गा मंदिर, पिपरा गौतम दुर्गा माता मंदिर सहित तमाम मंदिरों में दिन भर पूजन अर्चन चलता रहा। इस दौरान भक्तो ने देवी की पूजा-अर्चना की तथा उनसे धन-धान्य, पुत्र एवं सफलता का आशीर्वाद मांगा।
नवरात्र में इन दिनों मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। लोग हवन के साथ पूजा आदि करने के लिए प्रसिद्ध मंदिरों के चौखट पर माथा टेक रहे हैं। मंदिर के कपाट भोर में 4 बजे ही खुल रहे हैं। सफाई आदि के बाद श्रद्धालुुु माता के दर्शन कर रहे हैं।
पंडित देवस्य मिश्र ने बताया कि ब्रह्मचारिणी दो शब्दों से मिलकर बना है। ब्रह्म का मतलब घोर तपस्या और चारिणी का अर्थ आचरण है। यानी माता का दूसरा स्वरूप तप का आचरण करने से होता है। मां दुर्गा के नव शक्तियों के इस दूसरे स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी ने अपने पूर्व जन्म में जब हिमालय के घर में पुत्री रूप में उत्पन्न हुई थीं तब नारद के उपदेश से उन्होंने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की थी। इस कठोर तपस्या के कारण इन्हें तपस्चारिणी अर्थात ब्रह्मचारिणी नाम से समस्त जगत में पूजा जाता है।