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जिला अस्पताल में मरीज हो रहे परेशान

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‌‌‌‌परेश्‍ाानी - फोटो : ramesh mishra
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बस्ती।  गर्मी और उमस के चलते लोग बीमार हो रहे हैं। अधिकतर लोग मौसमी बीमारी से ग्रसित हैं।  जिला अस्पताल में मरीजों के पहुंचने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन प्रतिदिन बढ़ रही है। एक एक दिन में हजार तक पर्चियां कट जा रही हैं। ओपीडी में मरीजों का मेला लगा रहता है।  जितना दिखाने वाले उससे अधिक पर्ची बनवाने वालों की लाइन लगी रहती है। यह सिलसिला सुबह आठ बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक चलता रहता है। 
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शनिवार को तो 12 बजे तक दो काउंटर से 1000  हजार पर्ची काटी जा चुकी थी। पर्ची बनवाने के बाद मरीजों को चिकित्सकों के आने का लंबा इंतजार करना पड़ता है। कोई भी चिकित्सक दस बजे से पहले नहीं आते।  ओपीडी में पर्चा जमा करने के बाद के मरीज डॉक्टर के आने का इंतजार करते है। इस बीच मरीज दिखाने के लिए कमरे में धक्का-मुक्की का सिलसिला चलता रहता है।

मौसम के बदलते मिजाज से लोगों  को मुश्किल में डाल दिया है। अचानक बारिश और उमस से बच्चों से लेकर बूढ़े सभी इसकी चपेट में आ रहे हैं। वायरल फीवर, डायरिया, उल्टीदस्त, पेट दर्द, गैस्टिक, चर्म रोग के मरीज बढ़ गए हैं। वहीं, आंखों में होने वाली परेशानियों से लोग परेशान हैं। बच्चों में डायरिया और पेट की बीमारी हो रही है।  अस्पताल में दवा पर्याप्त मात्रा में होने के बावजूद बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। मरीजों को जरूरत की दवाएं अस्पताल से नहीं मिल पा रही है। एक्सरे और अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लोग परेशान रहते हैं।  मुख्य फार्मासिस्ट अजय श्रीवास्तव के मुताबिक अस्पताल में दवाओं की कोई कमी नहीं है। फिर भी डॉक्टर क्यों बाहर की दवा लिख रहे हैं, समझ से परे हैं।
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मथौली बनकटी से राम अजोर दुबे ने बताया कि आँख से देखने में काफी दिनों दिक्कत हो रही थी। बताया कि उसे चिकित्सकों को दिखाने से लेकर दवा लेने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कप्तानगंज के वंशीधर ने बताया कि वह पेट दर्द से परेशान था। उसके कारण डॉक्टर के पास आया था। पर्ची पर सब बाहर की दवा लिखी है। मजुहना निवासी सूरज तिवारी ने बताया कि चेहरे पर दाने निकल आने से परेशान था।  चौथी बार दिखाया है। एक ही दवा बार-बार लिखी जा रही है। कोई फायदा नहीं है। शहर के पियूष पांडेय ने बताया कि बच्चे को दो दिन से उल्टी दस्त की शिकायत के बाद सुबह से दिखाने के लिए लाइन में खड़ा हूं। तीन घंटे बाद दिखाने का नंबर आया। बताया कि अधिकतर दवाएं बाहर की लिखी जाती हैं। फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि मौसम में परिवर्तन के चलते मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ओपीडी के साथ इमरजेंसी में पेट, उल्टी दस्त, डायरिया के मरीज भर्ती हो रहे है। बताया कि यह कहना गलत है कि बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। अस्पताल में जो दवाएं उपलब्ध हैं उसे ही लिखा जाता है।
 बचाव के उपाए 
बीमारियों से बचने के लिए लोग स्वच्छ पानी का सेवन करें, बच्चों को समय पर ओआरएस का घोल दें, गंदगी से दूर रखें, खुले खानपान से परहेज करें। आँख को धूल और वायरस से बचाव के लिए चश्मे का प्रयोग करें। 
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