बस्ती। धान खरीद का समय 28 फरवरी तक है। यानी अभी सात दिन बाकी हैं, मगर मंडल के सभी क्रय केंद्र बंद हो चुुके हैं। यह अलग बात है कि इस बार सरकार के तमाम दावों के बावजूद खरीद का ग्राफ 43 फीसद पर ठहर गया। धान खरीद के लिए मंडल में तय 2.84 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष खरीद 1.23 एमटी हो सकी है।
किसानों के प्रति संवेदनशील शासन की मंशा को धान खरीद में झटका लगा है। शुरूआती दौर से ही खरीद को लेकर उहापोह की स्थिति बनी रही। इसका परिणाम यह रहा है कि तमाम प्रयास के बावजूद जैसे-तैसे खरीद 43 प्रतिशत तक पहुंच पाई, हालांकि खरीद में इस बार बस्ती अव्वल रहा। यहां खरीद का ग्राम 75.17 फीसदी तक पहुंचा, संतकबीर नगर का खरीद ग्राफ 66.78 तो सिद्धार्थनगर में 61.71 प्रतिशत रहा।
नगर बाजार के किसान सुधाकर मिश्र कहते हैं कि क्रय केंद्रों पर धान बेचने से बेहतर है कि बाजार में बेचना। क्योंकि केंद्रों पर तमाम दिक्कतें आती हैं। मसलन धान सूखा कर लाने, साफ करने जबकि बाजार में इसका झंझट नहीं रहता और नकद रुपया भी मिल जाता है।
किसान राममूरत व मडवानर के किसान भृगु चौधरी कहते हैं कि सरकार के तमाम प्रयास जिम्मेदारों के सामने दम तोड़ देते हैं। नियम का पालन करना ही कठिन है। ऐसे में बाजार धान बेचने के लिए बेहतर विकल्प है। थोड़ा इंतजार यदि किसान कर लें तो उनको अच्छी कीमत मिल जाती है।
संभागीय खाद्य नियंत्रक श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि धान खरीद में इस बार का ग्राफ अन्य वर्षों की तुलना में दो गुना से ज्यादा है। पिछले साल तो मात्र 21 फीसदी खरीद हुई थी, मगर इस बार का ग्राफ 43 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच गया है। न्यूनतम मूल्य समर्थन योजना का उद्देश्य पूरा हो चुका है। बाजार में अब धान की कीमत क्रय केंद्रों से ज्यादा है। ऐसे में किसान बाजार में सीधे धान पहुंचा रहा है। यह सरकार की किसान नीति का ही हिस्सा है।