गोटवा में अगिया लगी धान की फसल का निरीक्षण करने पहुंचे पौध सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. प्रेमशंकर। संवा
बचाव के उपाय न करने पर उठाना पड़ सकता है आर्थिक नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कृषि विज्ञान केंद्र के पौध सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. प्रेम शंकर ने बताया कि धान की फसल फिर अगिया या हल्दिया रोग की चपेट में आ गई है। इससे उत्पादन व बिक्री पर असर पड़ेगा। समय रहते यदि किसानों ने बचाव का प्रबंध नहीं किया तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि अगिया रोग की चपेट में से धान की फसल खराब हो जाती है। फसल के धान मर जाते हैं और उत्पादन घट जाता है। बताया कि 23 सितंबर को किसानों के प्रक्षेत्र भ्रमण व निरीक्षण के दौरान फसल में अगिया रोग लगा हुआ पाया गया। मौसम को देखकर कहा जा सकता है कि यह रोग तेजी से फसलों को चपेट में लेना शुरू कर चुका है। तापमान में उतार-चढ़ाव, बादल, बारिश, उच्च आर्द्रता की स्थिति होने पर यह रोग तेजी से फैलता है।
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उन्होंने बताया कि अगिया रोग को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता। कुछ रसायनों की मदद से नियंत्रित जरूर किया जा सकता है। खड़ी फसल में संक्रमण रोकने के लिए पहला छिड़काव बालियां निकलने के तुरंत बाद करें। इस अवस्था में प्रोपीनाजोल 25 प्रतिशत ईसी टिल्ट/जेरॉक्स की 200 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़ के हिसाब से 100 से 120 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। दूसरा छिड़काव 10 से 15 दिन के अंतराल पर प्रोपीकोनाजोल 13.9 प्रतिशत+डीफैनकोनाजोल 13.9 प्रतिशत ईसी मिश्रण की 200 मिलीग्राम मात्रा प्रति एकड़ के हिसाब से 100 से 120 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।