सच्चिदानंद केस : साध्वियों के यौन शोषण मामले की चल रही सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। चेतावनी और अवसर देने के बावजूद जिरह से बचने से नाराज न्यायालय ने सच्चिदानंद व उसके सहयोगी परमचेतनानंद का जिरह का अवसर समाप्त कर दिया है। इससे दोनों आरोपियों ने पीड़िता की गवाही पर न्यायालय में सफाई मांगने का अधिकार खो दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 मई तारीख तय की है।
बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान सच्चिदानंद व परमचेतनानंद की तरफ से स्थगन प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें कहा गया कि साक्षी से जिरह के लिए आठ तारीखें लगवाई गईं। इस दौरान साक्षी से कुल 14 पेज की जिरह की गई। मगर अभियुक्त साक्षी से मात्र आंशिक जिरह कर रहे हैं। कई बार न्यायालय की चेतावनी के बावजूद अविलंब जिरह समाप्त नहीं किया। जबकि प्रकरण में उच्च न्यायालय से शीघ्र निस्तारित एवं विचारण में सहयोग करने का निर्देश पारित किया गया है। चूंकि सच्चिदानंद एवं परमचेतनानंद को जिरह के लिए पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है, इसलिए दोनों का जिरह का अवसर समाप्त किया जाता है।
बता दें कि केस की अलग फाइल की 25 अप्रैल को सुनवाई के बाद न्यायालय ने आदेश में कहा था कि छह अप्रैल से लगातार जिरह चल रही है। जिरह के दौरान केस के दोनों पक्षों के बीच वाद-विवाद होता रहता है। इससे न्यायिक कार्य बाधित होता है। अभियुक्त मामले को जान बूझकर लंबा खींचने के लिए टाल मटोल कर रहे हैं। साक्षी को प्रतिदिन बुलाकर परेशान किया जा रहा है। ऐसे में अभियुक्तों के हाजिरी माफी प्रार्थनापत्र को खारिज करते हुए उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। इसके बावजूद आरोपी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ।