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बस्ती में सेहत से खिलवाड़: मिलावटी पनीर बेचकर कमा रहे डेढ़ गुना मुनाफा, मथुरा-हरियाणा कनेक्शन

Sat, 09 May 2026 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती

सार

जिले में पनीर की खपत वर्तमान में सहालग के दौरान रोजाना 60 से 70 क्विंटल पहुंच गया है। इस मांग को पूरा करने के लिए धंधेबाज अंबेडकरनगर, अयोध्या के साथ बलरामपुर क्षेत्र से पनीर मंगवा रहे हैं। साथ ही लोकल के निर्माण इकाइयों से भी पनीर मंगवा रहे हैं। पूर्व में इसका खुलासा भी हो चुका है।
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बाजार में ऐसे बेंच रहे पनीर संवाद
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विस्तार
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सहालग की आड़ में मिलावट के धंधेबाज मुनाफे के लिए एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। जनपद में अचानक से पनीर की डिमांड बढ़ी तो मिलावटखोर नकली पनीर की खेप खपाने के लिए नया तरकीब खोज लिए।जानकारों का कहना है कि कानपुर, मथुरा, हरियाणा से मिलावटी पनीर मंगवाकर उसे असली बताकर बेंच कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।

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बाहर से 180 रुपये किलो का मिलावटी पनीर मंगाकर यहां आसानी से 300 रुपये किलो तक बेच रहे हैं। जानकारों के अनुसार, मिलावटी पनीर की लागत करीब 100-120 रुपये किलो पड़ती है। मिलावटखोर इसे डेयरी संचालकों को 170 से 180 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचते हैं।

डेयरी संचालक और दुकानदार इसे 300-320 रुपये किलो में ग्राहकों को बेचते हैं। बड़ा ऑर्डर मिलने पर 15-20 रुपये प्रतिकिलो कम कर देते हैं। सहालग में पहले से बुकिंग कर लिए धंधेबाज आयोजन के दिन इसी पनीर की सप्लाई कर देते हैं।

बताया जा रहा है लोकल और आसपास जनपदों से मिलावटी पनीर मंगवाने पर महंगा पड़ता है। ऐसे में हरियाणा, मथुरा और कानपुर की मिलावटी पनीर को तरजीह देते हैं। बता दें कि जनपद में दूध का उत्पादन कागज में तो 46 हजार लीटर रोजाना है, मगर गर्मी में यह औसत गिरकर 40 हजार लीटर के नीचे आ चुका है।

इधर, सहालग में दूध, पनीर और खोआ की मांग बढ़ी तो धंधेबाज मिलावटी खाद्य सामग्री खपाने में जुट गए हैं। सूत्रों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर दूध उत्पादन कम होने और सहालग होने के कारण आवश्यकता बढ़कर 70 से 80 हजार लीटर पहुंच गई है। इतने दूध में पनीर, दूध व खोआ की डिमांड पूरी नहीं हो सकती हैं लिहाजा, पाउडर वाले दूध का सहारा ले रहे हैं।

इसके पाउडर वाले दूध के कारोबार में भी दोगुना का उछाल आया है। दुग्ध कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि कुछ दिन पहले तक बस्ती में रोजाना 10 से 15 हजार लीटर पाउडर का दूध खप रहा था, जो बढ़कर 30 से 35 हजार लीटर हो गया है। मांग के अनुसार, बाहरी दूध, पनीर, खोआ ही सहालग में सहारा बना हुआ है।
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जनपद में दुधारू पशुओं की संख्या 7791 है। मगर, जिले में पनीर की खपत वर्तमान में सहालग के दौरान रोजाना 60 से 70 क्विंटल पहुंच गया है। इस मांग को पूरा करने के लिए धंधेबाज अंबेडकरनगर, अयोध्या के साथ बलरामपुर क्षेत्र से पनीर मंगवा रहे हैं। साथ ही लोकल के निर्माण इकाइयों से भी पनीर मंगवा रहे हैं। पूर्व में इसका खुलासा भी हो चुका है।

ऑन डिमांड करते तैयार, रात में डेयरियों पर सप्लाई : सहालग के चलते नकली पनीर आसानी से बाजार में खप रहा है। 2.50 क्विंटल नकली पनीर पकड़ा गया। इससे पहले खोआ भी पकड़ा गया था। बताया जा रहा है कि धंधेबाज मिलावटी पनीर ऑन डिमांड बनाकर रात में डेयरी पर पहुंचाते हैं। छोटी गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं और चालक के जरिये कई डेयरियों पर भेजते हैं।

मिलावटी पनीर की ऐसे करें पहचान : मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल सिंह के अनुसार, मिलावटी पनीर कठोर होगा। दबाने पर ये बिखर जाएगा। ऊपर अतिरिक्त चिकनाई महसूस होगी। स्वाद भी हल्का कसैला प्रतीत होगा। वैसे पूरी तरह से जांच लैब में ही संभव है। मिलावटी सामग्री की शिकायत टोल फ्री नंबर 18001805533 पर शिकायत कर सकते हैं।
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