साइबर अपराध: ऑनलाइन शॉपिंग में कदम-कदम पर जोखिम
बस्ती। यदि सोशल मीडिया पर किसी चीज की कीमत काफी सस्ती लगे और उसकी होम डिलिवरी करने को कहा जा रहा हो तो अच्छी तरह पड़ताल कर लीजिएगा। क्योंकि साइबर अपराधियों ने इस तरह का फंडा फ्राड के लिए अपनाना शुरू कर दिया है। वर्ष-2020 में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें सेना के पुराने वाहन बताकर तमाम बोलेरो-स्कार्पियो और स्पोर्ट्स जीप का सौदा करने के चक्कर में लोग लाखों गवां चुके हैं।
आठ अगस्त को कलवारी थाने में प्रार्थना पत्र दिया गया। आवेदक राम किशोर शुक्ल ने लिखा कि उसके मोबाइल फोन पर पुराने ट्रैक्टर का विज्ञापन आया। विज्ञापन में अंकित मोबाइल फोन नंबर पर जब संपर्क किया गया तो योगेश सिंह नामक व्यक्ति को ट्रैक्टर मालिक बताकर उसका आधार कार्ड भेजा। कहा गया कि आर्मी ट्रांसपोर्ट से वाहन घर पहुंचाया जाएगा। पेटीएम के माध्यम से उसने करीब डेढ़ लाख रुपये अकाउंट में जमा कराया। बाद में नंबर बंद हो गया। पुलिस ने उसी नंबर के आधार पर राजस्थान के भरतपुर जिले के डीग तहसील के कल्यानपुर निवासी चार आरोपियों को पकड़ा। पड़ताल में पता चला कि इस तरह का ठगी करने का ट्रेंड चल रहा है। यह एक उदाहरण मात्र है। इसी तरह पूरे 2020 में पांच प्रकरण सामने आ चुके हैं। पुलिस ने सभी का पर्दाफाश कर दिया है।
ऐसे होती है धोखाधड़ी
इन दिनों साइबर ठगों का ऐसा गैंग सक्रिय है, जो दूसरों के नाम की फेंक आईडी बनाकर और उन्हीं के वाहन की फोटो यूजकर वाहन बेचने के नाम पर ऑनलाइन ठगी करते हैं। इसमें अधिकांश सेना के जवानों के नाम से आईडी बनाकर ठगी की जा रही है। सेना का नाम आते ही लोग एकदम से यकीन लर लेते हैं।
ध्यान रखें तो नहीं होंगे शिकार
एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि ऑनलाइन शॉपिंग करते समय यदि ग्राहक थोड़ी सी सावधानी बरते तो धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकता है। ऑनलाइन शॉपिंग करते समय लोगों को सावधानी रखने की जरूरत है। क्रेडिट या डेबिट कार्ड के नंबर, ओटीपी या सीवीवी कोड को भी ध्यान से भरें। यह सूचना संबंधित वेबसाइट पर सेव न करें। वरना खाते से बड़ी रकमभी निकल सकती है।
इन बातों पर ध्यान दें
हमेशा नामचीन और अच्छी कंपनी की वेबसाइट से ही खरीदारी करें। ज्यादा बचत देखकर किसी ऐसी वेबसाइट से खरीदारी न करें, जिसके बारे में जानकारी नहीं है। वेबसाइट का यूआरएल जरूर चेक करें। वह एचटीटीपी के बजाय एचटीटीपीएस होना चाहिए। आखिर में एस का मतलब है कि गूगल ने उसे सिक्योर्ड किया है। इससे आप धोखाधड़ी पर आसानी से क्लेम कर सकते हैं। किसी कंपनी का कोई उत्पाद अगर तीसरी कंपनी बेच रही है तो उसके नाम, पते आदि की जानकारी कर लें। ऑनलाइन शॉपिंग करने से पहले जान-पहचान वालों से भी संबंधित वेबसाइट व उसकी सर्विस के बारे में पता कर लें, ताकि धोखाधड़ी की आशंका न रहे। उत्पाद बुक करने के लिए जब भी ऑनलाइन बैंकिंग, क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पेमेंट करें तो बिल के बारे में जानकारी लें। बैंक अनुमति के बिना पेमेंट नहीं करती हैं। ऑनलाइन पेमेंट करते समय क्रेडिट कार्ड नंबर पहले न डालें। प्रोफार्मा पर उत्पाद की सूचना भर लें, इसके बाद बैंक से जुड़ी जानकारी भरें।